TMC को सुप्रीम कोर्ट से झटका, वोट गिनती में केंद्र के पर्यवेक्षकों पर मुहर
कोलकाता (पश्चिम बंगाल)। टीएमसी को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली। उसका पश्चिम बंगाल में वोट गणना में पर्यवेक्षक के रूप में केंद्र सरकार के अधिकारियों की नियुक्ति के मुद्दे पर चुनाव आयोग से विरोध था। सुप्रीम कोर्ट ने वोट गणना में पर्यवेक्षक के रूप में केंद्र सरकार के अधिकारियों को नियुक्त करने के चुनाव आयोग के निर्देश और इस मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट की ओर से किए गए फैसले को उचित ठहराया।
चुनाव आयोग का पहले से जारी था निर्देश
चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव में वोट गणना में केंद्र सरकार के अधिकारियों को पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त करने का निर्देश जारी किया था। उसने यह निर्देश चुनाव के पहले ही 13 अप्रैल को जारी किया था। 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को चुनाव हुए। वोट गणना 4 मई को है।
हाई कोर्ट में TMC की दलीलें खारिज
टीएमसी के सांसद और वकील कल्याण बनर्जी ने वोट गणना में पर्यवेक्षक के रूप में केंद्र सरकार के अधिकारियों को नियुक्त करने के खिलाफ कलकत्ता हाई कोर्ट में अपील की। कलकत्ता हाई कोर्ट ने 30 मई को सुनवाई की और चुनाव आयोग के उस निर्देश को बहाल रखा जिसके तहत केंद्र सरकार के अधिकारियों को वोट गणना में पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त किया गया है। कल्याण बनर्जी का तर्क था कि वोट गणना में राज्य सरकार के अधिकारियों को अलग रखा गया है। चुनाव में जब राज्य सरकार के अधिकारियों की सेवा ली जा सकती है तो वोट गणना में क्यों नहीं ली जा सकती।
चुनाव आयोग के अधिकार पर कोर्ट की मुहर
कलकत्ता हाई कोर्ट की सुनवाई में चुनाव आयोग की ओर से तर्क दिया गया कि चुनाव आयोग को यह अधिकार है कि वह केंद्र सरकार और राज्य सरकार के अधिकारियों की अपनी जरूरत के अनुसार नियुक्त कर सकता है। आयोग ने अपनी जरूरत के अनुसार ही केंद्र सरकार के अधिकारियो को नियुक्त किया है। इस पर कलकता हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग के फैसले को बहाल रखा।
सुप्रीम कोर्ट में भी नहीं बदला फैसला
टीएमसी हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की और सुप्रीम क्रोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट के ही फैसले को बहाल रखा। टीएमसी की ओर से वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी कि वोट गणना में पर्यवेक्षक के रूप में केंद्र सरकार के अधिकारियों को नियुक्त करने के निर्देश के बारे में राजनीतिक पर्टियों को देर से 29 अप्रैल को जानकारी दी गई। चुनाव आयोग राज्य सरकार के अधिकारियों को वोट गणना में नियुक्त कर सकता है। लेकिन उसने केवल केंद्र सरकार के अधिकारियों को नियुक्त कर राज्य सरकार के अधिकारियो के साथ भेदभाव किया है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वोट गणना में रिटर्निंग अधिकारी राज्य सरकार के ही अधिकारी हैं और उनके तहत ही पर्यवेक्षक को रूप में केंद्र सरकार के अधिकारी कार्य करेंगे। चुनाव आयोग का तर्क था कि केद्र सरकार और राज्य सरकार के अधिकारियों में कोई भेदभाव नहीं किया है।
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