शाजापुर जिला अस्पताल में 5 साल के मासूम की मौत, पिता ने लगाए लापरवाही के आरोप; बोले- समय पर नहीं मिली एंबुलेंस
शाजापुर {मध्यप्रदेश}: जिला अस्पताल में एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और एम्बुलेंस सेवाओं पर गंभीर सवाल उठे हैं। 5 वर्षीय मासूम हार्दिक जाटव की इलाज के दौरान मौत हो गई, जिसके बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन और 108 एम्बुलेंस सेवा की घोर लापरवाही का आरोप लगाया है। परिजनों का कहना है कि अगर समय पर एम्बुलेंस मिल जाती, तो बच्चे को समय रहते इंदौर रेफर कर उसकी जान बचाई जा सकती थी।
पिता ने एंबुलेंस नहीं मिलने का लगाया आरोप
मृतक हार्दिक के पिता बंटी जाटव ने बताया कि मेरे 5 साल के बेटे हार्दिक को पेट दर्द और बुखार की शिकायत थी, जिसे हम रात को अस्पताल लेकर आए थे। डॉक्टरों ने प्राथमिक इलाज के बाद कहा कि इसे तुरंत इंदौर ले जाओ। लेकिन डॉक्टरों ने साफ मना कर दिया कि बिना ऑक्सीजन सपोर्ट के एम्बुलेंस के इसे नहीं ले जाया जा सकता। मैं करीब दो घंटे तक एम्बुलेंस के लिए इधर-उधर हाथ-पैर जोड़ता रहा, लेकिन समय पर एम्बुलेंस नहीं मिली। एक निजी एम्बुलेंस वाले से बात की तो उसने ₹8,000 मांगे। आखिरकार जब 6:30 बजे एम्बुलेंस आई, तब तक देर हो चुकी थी और मेरा बच्चा दम तोड़ चुका था। अगर समय पर एम्बुलेंस मिल जाती तो मेरा बच्चा आज ज़िंदा होता। यह सरासर एम्बुलेंस और अस्पताल की लापरवाही है।
सिविल सर्जन ने लापरवाही के आरोपों से किया इनकार
मामले में सिविल सर्जन डॉ बीएस मीणा ने कहा कि बच्चा जब अस्पताल लाया गया था, तब उसकी स्थिति बेहद गंभीर थी। उसे डबल निमोनिया था और सांस लेने में काफी तकलीफ हो रही थी। परिजनों द्वारा अस्पताल लाने से पहले भी कहीं झाड़-फूंक या अन्य जगह इलाज कराने की बात सामने आई है। हमारे डॉक्टरों ने बच्चे का पूरा इलाज किया और 108 एम्बुलेंस के लिए भी तुरंत कॉल कर दिया गया था। इलाज में अस्पताल की ओर से कोई लापरवाही नहीं बरती गई है।
एंबुलेंस सेवा को लेकर फिर उठे सवाल
एक तरफ जहाँ पीड़ित पिता रो-रोकर एम्बुलेंस न मिलने और व्यवस्था की नाकामी का दर्द बयां कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ अस्पताल प्रशासन गंभीर स्थिति और समय पर एम्बुलेंस कॉल करने का हवाला देकर अपना पल्ला झाड़ता नज़र आ रहा है। इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोलकर रख दी है।
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