अयोध्या में संत समाज पर विभिन्न प्रकार के दबाव बनाए जाने की हो रही कोशिश: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती
वाराणसी: ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने रविवार को काशी विद्यामठ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान शिक्षा, छात्र आंदोलन, गौ-रक्षा और उत्तर प्रदेश सरकार की नीतियों सहित कई समसामयिक मुद्दों पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनआंदोलन परिवर्तन का माध्यम होते हैं और हाल में हुए छात्र आंदोलन ने यह साबित किया है कि संगठित प्रयासों से सरकार तक अपनी बात प्रभावी ढंग से पहुंचाई जा सकती है।
क्या था आंदोलन का मुख्य उद्देश्य
उन्होंने कहा कि हाल के छात्र आंदोलन में युवाओं ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को उठाया। उनके अनुसार, इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से जवाबदेही तय करना था। शंकराचार्य ने इसे युवाओं की लोकतांत्रिक जीत बताते हुए कहा कि किसी मंत्री का पद छोड़ना केवल व्यक्ति परिवर्तन नहीं, बल्कि शासन व्यवस्था में जवाबदेही तय होने का संकेत भी है।
संत समाज पर विभिन्न प्रकार के दबाव बनाए जाने की हो रही कोशिश
अयोध्या से जुड़े एक सवाल पर उन्होंने कहा कि वहां संत समाज पर विभिन्न प्रकार के दबाव बनाए जाने की कोशिश की जा रही है। उनका आरोप था कि कुछ संगठन संतों और महंतों को अपने पक्ष में करने के लिए प्रयासरत हैं। हालांकि, उन्होंने अपने इस दावे के समर्थन में कोई स्वतंत्र प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया।
गौ-रक्षा के मुद्दे पर शंकराचार्य ने कहा...
गौ-रक्षा के मुद्दे पर बोलते हुए शंकराचार्य ने अपनी 81 दिवसीय गौ-रक्षा यात्रा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान प्रदेश के विभिन्न जिलों में लोगों से संवाद करने पर अधिकांश लोगों ने गाय को माता का दर्जा दिया। उनका कहना था कि जब समाज गाय को माता मानता है, तो सरकारी स्तर पर भी उसके संरक्षण के लिए अधिक प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।
गौ-आश्रय केंद्रों को लेकर जारी किए गए दावों पर खड़े किए सवाल
उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गौ-आश्रय केंद्रों को लेकर जारी किए गए दावों पर भी सवाल खड़े किए। शंकराचार्य ने मांग की है कि प्रदेश के सभी गौ-आश्रय केंद्रों के पिछले तीन-चार महीनों के सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक किए जाएं, ताकि वहां की वास्तविक स्थिति लोगों के सामने आ सके। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो उनके समर्थक स्वयं विभिन्न गौशालाओं का निरीक्षण करेंगे।
शंकराचार्य ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की गौ-नीति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर सरकार वास्तव में गौ-संरक्षण के प्रति गंभीर है, तो उसका प्रभाव जमीनी स्तर पर स्पष्ट दिखाई देना चाहिए।
ये भी पढ़ें- 'युवा सब देख रहे हैं': नए शिक्षा मंत्री को CJP की चेतावनी, 5 सूत्री चार्टर लागू करने की मांग