उत्तर प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र में उच्च शि

शिक्षा सेवा चयन आयोग समेत चार संशोधन विधेयक विधानसभा से पास

शिक्षा सेवा चयन आयोग समेत चार संशोधन विधेयक विधानसभा से पास

गोरखपुर, शाहजहांपुर और भदोही में नयी यूनिवर्सिटी बनने का मार्ग प्रशस्त

लखनऊ।  उत्तर प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र में उच्च शिक्षा विभाग के चार संशोधन विधेयकों को मंजूरी मिली है। इनमें मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग संशोधन विधेयक  2025  शामिल है। इसका  उद्देश्य चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना है। साथ ही निजी विश्वविद्यालयों के नियमन और उच्च शिक्षा को मजबूत करने के लिए भी विधेयक पारित हुए हैं, जिससे राज्य में शिक्षा प्रणाली में बड़े सुधार होंगे और नए विश्वविद्यालयों के मार्ग प्रशस्त होंगे। 

उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि वर्ष 2023 से पहले प्रदेश में अलग-अलग शिक्षण संस्थानों के लिए अलग-अलग चयन आयोग थे। पारदर्शिता के उद्देश्य से अब एकीकृत आयोग की स्थापना की गई। उन्होंने कहा कि इन सभी विधेयकों का लक्ष्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप उच्च शिक्षा में व्यापक बदलाव लाना, पारदर्शिता बढ़ाना और शिक्षण-अनुसंधान को बढ़ावा देना है। यह आयोग विवि, सहायता प्राप्त महाविद्यालयों, इंटरमीडिएट कॉलेजों, बेसिक विद्यालयों, अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों व अटल आवासीय विद्यालयों में शिक्षकों और अनुदेशकों के चयन का कार्य कर रहा है। 

आयोग के अध्यक्ष पद की अर्हता के दायरे को विस्तृत किया

उन्होंने कहा कि आयोग का कार्य अकादमिक चयन तक ही सीमित नहीं है। इस पर बड़े स्तर पर प्रशासनिक प्रबंधन, परीक्षा संचालन, ओएमआर व सीबीटी का प्रयोग, समय से परिणाम घोषित करना जैसी जिम्मेदारियां हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए आयोग के अध्यक्ष पद की अर्हता के दायरे को विस्तृत किया गया है। उन्होंने बताया कि सदन ने उप्र निजी विवि (तृतीय संशोधन) विधेयक 2025, उप्र निजी विवि (चतुर्थ संशोधन) विधेयक 2025, उप्र निजी विवि (पंचम संशोधन) विधेयक 2025 को भी पारित कर दिया है।

उच्च शिक्षा मंत्री ने उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक–2025 पर चर्चा करते हुए कहा कि शिक्षा और चिकित्सा मानव जीवन की मूल आवश्यकता हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने प्रत्येक मंडल में कम से कम एक सरकारी विश्वविद्यालय स्थापित करने का संकल्प पूरा किया है। साथ ही निजी क्षेत्र की भागीदारी से प्रदेश को शिक्षा का राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय हब बनाने की दिशा में ठोस कार्य किया गया है। 

आज कई विश्वविद्यालय वर्ल्ड रैंकिंग में शामिलः मंत्री

उच्च शिक्षा मंत्री उपाध्याय ने कहा कि पूर्व में उत्तर प्रदेश में एक भी विश्वविद्यालय अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में शामिल नहीं था, जबकि आज प्रदेश के कई सरकारी विश्वविद्यालय नैक, क्यूएस वर्ल्ड रैंकिंग और यूएस एशिया रैंकिंग में स्थान बना चुके हैं। निजी विश्वविद्यालयों के आने से न केवल उच्च शिक्षा का विस्तार हुआ है, बल्कि प्रतिस्पर्धा के कारण गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार आया है। उन्होंने बताया कि निजी विश्वविद्यालयों पर उच्च शिक्षा परिषद के माध्यम से प्रभावी नियंत्रण व्यवस्था लागू है और सरकार का उद्देश्य अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना है।

निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक  राज्य में निजी विश्वविद्यालयों के विनियमन को मजबूत करने और गुणवत्ता सुधारने के लिए यह विधेयक लाया गया है।  इसके साथ ही, शाहजहांपुर, भदोही और गोरखपुर में नए विश्वविद्यालयों की स्थापना का मार्ग भी प्रशस्त हुआ है, जिससे उच्च शिक्षा का विस्तार होगा।

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