सिद्धारमैया स्टिंग केस में बड़ा खुलासा: पुलिस बोली- 'मनगढ़ंत है यौन शोषण का वीडियो, दिल्ली से आरोपी गिरफ्तार'
बेंगलुरु (कर्नाटक)। पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को निशाना बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किए जा रहे कथित 'स्टिंग वीडियो' मामले में बेंगलुरु पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। पुलिस की शुरुआती जांच में साफ हुआ है कि वीडियो में लगाए गए यौन शोषण के आरोप पूरी तरह फर्जी, मनगढ़ंत और एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा हैं।
बेंगलुरु शहर पुलिस आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी एक प्रेस नोट के मुताबिक, इस कथित स्टिंग वीडियो के निर्माण, रिकॉर्डिंग, इसे पास रखने और सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के पूरे नेटवर्क की गहन जांच की जा रही है।
पुलिस का कहना है कि अब तक दर्ज किए गए बयानों और एकत्र किए गए तकनीकी साक्ष्यों से किसी भी तरह की आपराधिक घटना की पुष्टि नहीं होती है।
दिल्ली से तार जुड़े, एक आरोपी गिरफ्तार
जांच एजेंसियों ने वीडियो अपलोड करने में इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन का सुराग लगा लिया है। यह फोन दिल्ली की एक सेकेंड हैंड मोबाइल शॉप से खरीदा गया था।
मामले की जांच करते हुए पुलिस ने 24 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) से एक आरोपी को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, पकड़ा गया आरोपी एक फ्रीलांस सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर है, जिसके तार दिल्ली के कुछ बड़े राजनीतिक रसूख वाले लोगों से जुड़े होने की आशंका है।
2011 का मामला, 2023 में रिकॉर्डिंग और 2026 में वायरल
जांच में बेहद चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार, जिस घटना का दावा वीडियो में किया गया है वह साल 2011 की बताई जा रही है। वहीं, इस वीडियो को कथित तौर पर 2023 में रिकॉर्ड किया गया और सितंबर-अक्टूबर 2026 के दौरान इसे इंटरनेट पर वायरल किया गया।
जिस ओरिजिनल मोबाइल से यह वीडियो रिकॉर्ड हुआ था, उसे भी जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है। फिलहाल फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
पहचान छिपाने के लिए VPN और फर्जी नंबरों का खेल
पुलिस ने बताया कि यूट्यूब और 'एक्स' पर इस वीडियो को अपलोड करने के लिए बेहद शातिराना तरीका अपनाया गया था। पहचान छिपाने के लिए वीपीएन (VPN), मास्क किए गए आईपी एड्रेस और फर्जी फोन नंबरों का इस्तेमाल किया गया।
डिजिटल जांच में यह भी सामने आया है कि वीडियो अपलोडिंग के शुरुआती लोकेशन ट्रेस कर्नाटक से बाहर के पाए गए हैं।
राज्य के बड़े नेताओं की छवि खराब करने की साजिश
बेंगलुरु पुलिस के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम के पीछे राज्य के जिम्मेदार पदों पर बैठे राजनीतिक व्यक्तियों की छवि धूमिल करने और जनता में भ्रम व राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने की सोची-समझी साजिश नजर आती है। इसमें कई लोगों के शामिल होने की आशंका है, जिसकी हर कोण से जांच हो रही है।
पुलिस कमिश्नर ने आम जनता और मीडिया से अपील की है कि वे बिना पुष्टि वाले इस तरह के वीडियो और आरोपों को आगे शेयर या प्रसारित न करें। पुलिस ने निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई का भरोसा दिया है। (इनपुट: ANI)
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