चुनाव आयोग द्वारा एसआइआर की समय सीमा एक सप्ताह बढ़

एसआइआर की समय सीमा बढ़ने पर पश्चिम बंगाल में गरमाई राजनीति

एसआइआर की समय सीमा बढ़ने पर पश्चिम बंगाल में गरमाई राजनीति

 भाजपा ने चुनाव आयोग के इस फैसले को उचित कदम बताया

कोलकाता।  चुनाव आयोग द्वारा एसआइआर की समय सीमा एक सप्ताह बढ़ाए जाने पर पश्चिम बंगाल में पक्ष-विपक्ष में राजनीति गरमा गई है। एसआइआर ज्यादा समय में कराने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे बीएलओ के संगठनों का संतोष जताते हुए यह कहा कि आंदोलन के दबाव की वजह से चुनाव आयोग को झुकना पड़ा है।  टीएमसी का आरोप है कि चुनाव आयोग ने भाजपा की विफलताओं को ढंकने के मकसद से समय सीमा को बढ़ाया है। माकपा समेत दूसरी विरोधी पार्टियां समय सीमा को बढ़ाए जाने को चुनाव आयोग द्वारा की जाने वाली व्यवस्था की कमजोरी बताया है।  भाजपा ने चुनाव आयोग के इस फैसले को उचित कदम बताया है। 

टीएमसी का चुनाव आयोग पर भाजपा के दबाव में काम करने का आरोप

टीएमसी के प्रवक्ता अरूप चक्रवर्ती का कहना है कि चुनाव आयोग भाजपा के मकसद को पूरा करने के लिए एसआइआर की समय सीमा  केवल एक सप्ताह के लिए बढ़ाया है। उन्होंने चुनाव आयोग पर भाजपा के दबाव में काम करने का आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव आयोग जल्दबाजी में एसआइआर नहीं कराकर कम से कम दो साल में कराए। उन्होंने कहा कि विरोधी पार्टियों की मांगों की उपेक्षा कर रही है। टीएमसी प्रवक्ता अरूप चक्रवर्ती ने स्पष्ट किया कि टीएमसी एसआइआर की विरोधी नहीं है। वह इसे दो-तीन साल में पूरा कराने के पक्ष में है जैसा कि 2002 में दो साल में एसआइआर कराया गया था। उन्हेंने भाजपा की आलोचना करते हुए कहा कि उसने चुनाव आयोग तो अपने राजनीतिक मकसद को पूरा करने के लिए अपना औजार बना रखा है।  माकपा के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने कहा कि समय सीमा बढ़ाना चुनाव आयोग की तैयारी और एसआइआर की देखरेख की कमी है। उन्होंने चुनाव आयोग पर आम वोटरों की स्थिति से अनभिज्ञ होने का आरोप लगाया। 

भाजपा ने चुनाव आयोग का समर्थन किया है। भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री सुकांत मजुमदार ने एसआइआर की समय सीमा बढ़ाने को उचित बताते हुए कहा कि चुनाव आयोग चाहे तो एसआइआर के लिए एक-दो साल का समय ले सकता है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा निश्चित किए गए समय में एसआइआर पूरा नहीं होने की स्थिति में पश्चिम बंगाल में चुनाव नहीं होने पर राष्ट्रपति शासन लागू हो सकता है। इस पर भाजपा को कोई आपत्ति नहीं होगी। जानकारों के अनुसार उन बीएलओ को वोटरों से गणना फार्म जमा लेने और डाटा एंट्री करने का समय मिल गया है, जो अब तक इस काम को पूरा नहीं कर पाए है।  मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय के सूत्रों के अनुसार अब बीएलओ एसआइआर का काम पूरा करने में कोई कोताही नहीं कर सकते। उन्हे अब 11 दिसंबर तक गणना फार्म जमा कर उनके डाटा एंट्री का काम पूरा कर लेना है। एसआइआर के कार्य में अब कोताही होने पर बीएलओ के खिलाफ अनुशासनात्माक कार्रवाई होगी।

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