सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से हटाए गए वोटरों की सूची मंत्रालय को देने को कहाः बनर्जी
कोलकता। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग की ओर से कराए गए एसआईआर को वैध माना और कहा कि किसे वोटर बनाया जाए, किसे नहीं, यह उसके अधीन है। लेकिन जिसे वोटर नहीं बनाया गया, वह भारतीय नागरिक है या नहीं है, यह केंद्र सरकार के संबंधित मंत्रालय (विदेश मंत्रालय या गृह मंत्रालय) तय करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश किया है कि वह उन लोगों की सूची केंद्र सरकार के संबंधित मंत्रालय के पास चार सप्ताह में भेजे जिनका नाम वोटर लिस्ट से हटाया गया है और केंद्र सरकार का संबंधित मंत्रालय होने वाले लोकसभा या विधानसभा चुनाव के उनके बारे निर्णय लें।
आरजेडी, टीएमसी ने लगाई थी याचिका
तृणमूल कांग्रेस के सांसद और अधिवक्ता कल्याण बनर्जी के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में किए गए एसआईआर के मामले में चुनाव आयोग को निर्देश दिया है। उनके अनुसार आरजेडी, टीएमसी समेत कई राजनीतिक पर्टियों की ओर से एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ याचिका डाली थी जिसकी सुनवाई हुई।
मंत्रालय को संबंधित व्यक्ति की सुनवाई भी करनी होगी
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग भारतीय नागरिक को चुनाव में वोट देने के लिए वोटर बनाता है। वह यह तय नहीं करता कि कौन नागरिक है या कौन नहीं। इसके लिए केंद्र सरकार के संबंधित मंत्रालय हैं। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वोटर लिस्ट से जिनके नाम हटाए गए हैं, उनकी लिस्ट केंद्र सरकार के संबंधित मंत्रालय के पास चार सप्ताह में भेजे। केंद्र सरकारके संबंधित मंत्रालय को विधानसभा चुनाव व लोकसभा चुनाव के पहले बताना होगा कि कौन भारतीय नागरिक है और कौन नही है। इसके पहले उसे संबंधित व्यक्ति की सुनवाई करनी होगी।
पश्चिम बंगाल में भी लाखों वोटरों के नाम हटाए गए हैं
जानकारों के अनुसार पश्चिम बंगाल में भी एसआईआर मे काफी तादाद में वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं। जिन वोटरों को नाम हटाए गए है, उन्हें गैर भारतीय के रूप मे चिह्नित किया जा रहा है। भाजपा की सरकार ने उन लोगों को कल्याणकारी योजनाओं को लाभ देना बंद करने जा रही है, जो वोटर नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश से उन्हें राहत मिल सकती है जिन्हें अभारतीय के रूप में चिह्नित किया जा रहा है।
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