थप्पड़ कांड के बाद भड़की जातिगत राजनीति, क्षत्रियों ने भरी हुंकार
गोरखपुर {उत्तर प्रदेश}: नगर पंचायत बांसगांव स्थित ऐतिहासिक दुर्गा मंदिर परिसर में आयोजित बैठक में करीब दो हजार की संख्या में क्षत्रिय समाज के लोग जुटे। बैठक में बांसगांव के पूर्व चेयरमैन एवं सपा के पूर्व नेता अंशुमान सिंह के खिलाफ दर्ज मुकदमे और पुलिसिया कार्रवाई को लेकर लोगों ने जोरदार आक्रोश व्यक्त किया। बैठक में एक स्वर से कहा गया कि यदि प्रशासन ने उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया तो क्षत्रिय समाज वृहद आंदोलन करने को बाध्य होगा।
एफआईआर में हत्या के प्रयास की धारा पर आपत्ति
बताया गया कि विगत दिनों गोरखपुर प्रेस क्लब सभागार में हुई थप्पड़ कांड की घटना के बाद अंशुमान सिंह और उनके समर्थकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। मुकदमे में हत्या के प्रयास की धारा लगाए जाने को लेकर बैठक में मौजूद लोगों ने आपत्ति जताई। लोगों का कहना था कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और किसी भी पक्ष के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर बांसगांव क्षेत्र में क्षत्रिय समाज के लोगों में नाराजगी देखी जा रही है।
बैठक में कई प्रमुख लोग रहे मौजूद
नगर पंचायत अध्यक्ष प्रीती सिंह के प्रतिनिधि विजय कुमार सिंह (बबल बाबू) की ओर से बुलाई गई बैठक में बांसगांव सिविल बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष यशवंत सिंह श्रीनेत एडवोकेट, मंत्री विनय कुमार सिंह एडवोकेट, कनिष्ठ उपाध्यक्ष मांधाता सिंह, हरिनरायन सिंह (गोला), रत्नेश्वर सिंह राजू, राणा प्रताप सिंह, विजय प्रताप सिंह राशू, पवन शाही कौशिक तथा कोठा के ज्ञानेन्द्र सिंह सहित अन्य वक्ताओं ने विचार व्यक्त किए।
नेताओं के बयानों पर भी जताई नाराजगी
वक्ताओं ने सपा नेता नगीना साहनी तथा मंत्री संजय निषाद की ओर से क्षत्रिय समाज को लेकर दिए गए कथित बयानों पर भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। वक्ताओं ने कहा कि समाज के सम्मान और न्याय के मुद्दे पर किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि मंगलवार को मुख्यमंत्री को संबोधित मांग पत्र एसडीएम को सौंपा जाएगा।
एफआईआर से धारा हटाने की मांग
मांग पत्र में अंशुमान सिंह के खिलाफ दर्ज एफआईआर में हत्या के प्रयास की धारा हटाने तथा उनके परिवार के खिलाफ चल रहे कथित पुलिसिया उत्पीड़न पर तत्काल रोक लगाने की मांग की जाएगी। लोगों ने चेतावनी दी कि यदि जिला प्रशासन ने मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं की तो आगे वृहद आंदोलन की रणनीति तय की जाए।
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