सिर्फ 1 मीटर की दूरी और इतिहास तैयार! जानिए कैसे एमपी की सबसे बड़ी नहर सुरंग बुझाएगी 1450 गांवों की प्यास
कटनी (मध्य प्रदेश)। मध्य प्रदेश की महत्वाकांक्षी स्लीमानाबाद सुरंग लगभग 17 साल के निर्माण कार्य के बाद अब पूरा होने के कागार पर है। यह बरगी डायवर्जन प्रोजेक्ट का एक अहम हिस्सा है। फिलहाल बस एक मीटर की टनलिंग का काम बाकी बचा है। विंध्य पर्वत श्रृंखला से होकर गुजरने वाली 11.952 किलोमीटर लंबी और 10.14 मीटर व्यास वाली स्लीमानाबाद सुरंग, बिना पंप के इस्तेमाल के ग्रेविटी फ्लो (गुरुत्वाकर्षण प्रवाह) के ज़रिए नर्मदा का पानी सोन नदी बेसिन तक पहुंचाएगी। यह सुरंग जबलपुर में बरगी बांध से निकलने वाली 197 किलोमीटर लंबी 'राइट बैंक मेन कैनाल' का हिस्सा है।
विंध्य पर्वतमाला को भेदना रहा सबसे बड़ा चैलेंज
227 क्यूमेक की डिस्चार्ज क्षमता (जो राज्य में सबसे ज़्यादा है) वाली इस नहर को जबलपुर, कटनी, सतना, मैहर, रीवा और पन्ना ज़िलों के लगभग 1,450 गांवों में करीब 2.45 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को पक्का सिंचाई पानी उपलब्ध कराने के लिए डिज़ाइन किया गया है। विंध्य पर्वतमाला से होकर सुरंग बनाना इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी चुनौती थी। ओपन-कट तरीका मुमकिन नहीं था क्योंकि इसके लिए 40 मिलियन क्यूबिक मीटर से ज़्यादा मिट्टी की खुदाई करनी पड़ती, साथ ही जमीन के नीचे पानी का ऊंचा स्तर और मुश्किल भू-वैज्ञानिक स्थितियों से भी निपटना पड़ता।
रेलवे लाइन और हाईवे के नीचे से गुजरी सुरंग
यह सुरंग 'राइट बैंक मेन कैनाल' के 104वें और 116वें किलोमीटर के बीच बनी है। यह राष्ट्रीय राजमार्गों, रेलवे लाइनों, भूमिगत उपयोगिताओं और आबादी वाले क्षेत्रों के नीचे से बिना किसी संरचनात्मक क्षति के गुजरती है। विज्ञप्ति के अनुसार, निर्माण के दौरान इंजीनियरों को ज़मीन के नीचे बड़ी-बड़ी गुफाओं, 18,000-25,000 लीटर प्रति मिनट की दर से ज़मीन के नीचे से पानी के रिसाव, सिंकहोल, लिक्विफैक्शन (मिट्टी के तरल होने) के जोखिम, कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन और कठोर चट्टानों के कारण टनल बोरिंग मशीन (TBM) के कटर हेड के बार-बार खराब होने जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
मुश्किलों को मात देकर ब्रेकथ्रू के करीब पहुंचे इंजीनियर्स
इंजीनियरिंग चुनौतियों से निपटने के लिए TAM ग्राउटिंग, हाई-कैपेसिटी डीवॉटरिंग सिस्टम, कोर ड्रिलिंग और अपस्ट्रीम व डाउनस्ट्रीम दोनों तरफ से एक साथ टनलिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया। अब बस एक मीटर की टनलिंग बाकी है, और यह प्रोजेक्ट अपने अंतिम चरण (ब्रेकथ्रू) के करीब है। विज्ञप्ति में यह भी बताया गया है कि यह सुरंग नेशनल हाईवे, रेलवे लाइन, ज़मीन के नीचे की यूटिलिटीज़ और आबादी वाले इलाकों के नीचे से सुरक्षित रूप से गुज़रती है और ज़मीन के ऊपर बने बुनियादी ढांचे को कोई नुकसान नहीं पहुंचाती है। प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी पुनर्वास, उचित मुआवज़ा और दूसरी जगह बसाने का काम संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ किया गया।
कटनी से लेकर रीवा-सतना तक इन ज़िलों की बदलेगी किस्मत
पूरा होने पर, यह प्रोजेक्ट कटनी में 21,823 हेक्टेयर, मैहर में 54,227 हेक्टेयर, सतना में 1,04,970 हेक्टेयर, पन्ना में 448 हेक्टेयर और रीवा में 3,532 हेक्टेयर ज़मीन की सिंचाई करेगा, जिससे टनल के बाद कुल कमांड एरिया 1.85 लाख हेक्टेयर हो जाएगा। इसके अलावा, जल संसाधन विभाग के प्रोजेक्ट्स के तहत आने वाले 30,307 हेक्टेयर इलाके में भी पानी की सप्लाई की जाएगी। (भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
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