नई दिल्ली। देश में पर्यावरण मानकों से कॉरपोरेट एवर

छोटी कारों को कैफे-3 मानदंडों में छूट का टाटा, महिंद्रा व एमजी ने किया विरोध

Mahindra And Mahindra

नई दिल्ली। देश में पर्यावरण मानकों से कॉरपोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी (कैफे 3) नियमों के तहत 909 किलो से कम वजन वाली कारों को छूट दिये जाने के सुझाव का कई प्रमुख आटोमोबाइल कंपनियों ने विरोध किया है। इनमें टाटा और महिन्द्रा एंड महिन्द्रा शामिल हैं। नीति आयोग ने छोटी कारों को कैफे 3 मानकों में रियायत का प्रस्ताव दिया है। नीति आयोग ने कहा है कि आगामी कॉरपोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी (कैफे 3) नियमों के तहत 909 किलो से कम वजन वाली कारों को रियायत मिलनी चाहिए। नीति आयोग ने यह छूट मूल रूप से 1200 सीसी इंजन और 4 मीटर से कम लंबाई वाली हल्की (909 किलो से कम) कारों के लिए देने का सुझाव दिया है। नीति आयोग का 909 किलो से कम वजन वाली छोटी पेट्रोल कारों को CAFE-3 नियमों (अप्रैल 2027 से प्रभावी) के तहत 3 ग्राम/किमी उत्सर्जन की अतिरिक्त छूट देने का प्रस्ताव दिया है। इसका उद्देश्य इस सेगमेंट को पुनर्जीवित करना है।

कैफे-3 नियमों पर ऑटो कंपनियों का विरोध

नीति आयोग के इस प्रस्ताव का टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा और जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर ने कड़ा विरोध किया है। मिली जानकारी के अनुसार, इन तीनों कंपनियों ने नीति आयोग को ईमेल या पत्रों के माध्यम से रिपोर्ट में फ्लेक्स फ्यूल व्हीकल्स (एफएफवी) और कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) व्हीकल्स को जीरो एमिशन व्हीकल्स (जेडईवी) के रूप में वर्गीकृत किए जाने पर आपत्ति जताई है। इन कंपनियों का कहना है कि इस छूट से एक कंपनी को ही फायदा होगा इनका कहना है कि हल्की पेट्रोल कारों को छूट देना पर्यावरण के अनुकूल नहीं है। टाटा, महिंद्रा व अन्य कंपनियों का मानना है कि इससे सुरक्षित कारों के बजाय हल्की कारों (safety compromise) को बढ़ावा मिलेगा। इस विवाद को देखते हुए सरकार इसे अंतिम रूप देने से पहले सर्वसम्मत हल तलाशने का प्रयास कर रही है। नये नियम अप्रैल 27 से लागू करने का प्रस्ताव है। टाटा मोटर्स और महिंद्रा ऐंड महिंद्रा ने भी रिपोर्ट में खुद को सहयोगी या विशेषज्ञ बताए जाने पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि हितधारकों के साथ हुई चर्चाओं में उनकी भागीदारी का मतलब रिपोर्ट की सिफारिशों का पूर्ण समर्थन नहीं है। जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर इंडिया ने कहा कि रिपोर्ट को अंतिम रूप देने से पहले उनसे कोई परामर्श नहीं लिया गया था। न सिर्फ कार निर्माता बल्कि गैर-लाभकारी अनुसंधान संगठन इंटरनैशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन (आईसीसीटी) ने भी जीईवी वाहनों की परिभाषा का विरोध किया है। इन कंपनियों का मानना है कि यह छूट केवल एक ही प्रतियोगी (मारुति सुजुकी) को लाभ पहुंचाती है और प्रतिस्पर्धी माहौल को खराब करती है, जो छोटे कारों के 95% बाजार को नियंत्रित करती है।

छोटी कार छूट पर ऑटो कंपनियों का विरोध

नीति आयोग के सुझाव का विरोध करते हुए महिंद्रा एंड महिंद्रा ने चेतावनी दी है कि वजन आधारित छूट से वाहन की सुरक्षा या क्रैश परफॉर्मेंस से समझौता हो सकता है। टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा सहित प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनियों ने CAFE-3 नियमों के तहत 909 किलोग्राम से कम वजन वाली कारों को छूट देने के प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि यह छूट केवल एक ही प्रतियोगी (मारुति सुजुकी) को लाभ पहुंचाती है और प्रतिस्पर्धी माहौल को खराब करती है, जो छोटे कारों के 95% बाजार को नियंत्रित करती है। इन कंपनियों ने विरोध करते हुए तर्क दिया है कि यह छूट अनुचित है और यह विशेषकर मारुति सुजुकी जैसी कंपनी को फायदा पहुंचाती है। इससे सुरक्षा व इलेक्ट्रिक वाहन (EV) अपनाने में देरी हो सकती है।

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