छह महीने बाद बांग्लादेश से रिहा होकर घर लौटी सोनाली खातून, सुप्रीम कोर्ट के आदेश से मिली राहत
कोलकाता। पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के पाइकर के दर्जीपाड़ा निवासी सोनाली खातून आखिरकार बांग्लादेश से रिहा होकर अपने बेटे साबिर के साथ अपने गांव लौट आई है। हालांकि उनके पति दानिश, दो बच्चे ईमाम और कूरबान तथा पड़ोस की रहने वाली स्वीटी अभी भी बांग्लादेश में ही हैं। उनकी वापसी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद वापस लौटी सोनाली
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ही सोनाली खातून की वापसी संभव हो पाई है। कोर्ट ने सोनाली सहित सभी छह लोगों को भारत लाने के निर्देश दिए थे, लेकिन बीएसएफ ने केवल सोनाली और उनके बेटे साबिर को भारत लौटने की अनुमति दी है। बाकी चार लोगों की वापसी रोक दी गई है। इन लोगों की वापसी को लेकर 12 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी, जिसके बाद स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
दिल्ली पुलिस ने बांग्लादेशी होने के संदेह में किया था गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस ने करीब छह माह पहले बांग्लादेशी होने के संदेह में सोनाली सहित 6 लोगों को गिरफ्तार कर लिया था और बाद में उन्हें बांग्लादेश भेज दिया गया। पीड़ितों का आरोप है कि उन्होंने दिल्ली पुलिस को अपने पश्चिम बंगाल निवासी होने के प्रमाण दिए थे, लेकिन उनकी नहीं सुनी गई और उन्हें बांग्लादेश भेज दिया गया।
राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में उठाया मुद्दा
पीड़ित परिवार तथा स्थानीय लोगों ने टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव एवं सांसद अभिषेक बनर्जी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मदद की गुहार लगाई है। राज्य सरकार ने मामले को सुप्रीम कोर्ट में उठाया और पश्चिम बंगाल निवासी होने के सबूत पेश किए। इसके बाद कोर्ट ने केंद्र सरकार को छह लोगों को वापस लाने का आदेश दिया।
मालद की सीमा से भारत में हुई वापसी
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद केंद्र सरकार की कार्यवाही के तहत सोनाली और उनके बेटे साबिर को बीएसएफ ने मालद की सीमा से भारत में प्रवेश दिया। लेकिन शेष चार लोगों को रोक दिया गया। बीएसएफ अधिकारियों का कहना है कि उन्हें केवल सोनाली और उनके बेटे की वापसी के दस्तावेज प्राप्त हुए थे। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में 12 दिसंबर को अगली सुनवाई है जिसमें राज्य सरकार बाकी चार लोगों को वापस लाने के मुद्दे को उठाएगी।
स्वास्थ्य विभाग की देखरेख में हैं गर्भवती सोनाली
सोनाली खातून गर्भवती हैं, ऐसे में उनको राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग की देखरेख में रखा गया है। पहले उन्हें मालदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में जांच हेतु भर्ती किया गया और बाद में रामपुरहाट मेडिकल कॉलेज अस्पताल में स्थानांतरित किया गया। सोनाली की एक बेटी गिरफ्तारी से इसलिए बच गई कि घटना के समय वह अपने नाना-नानी के पास रह रही थी। मां से मिलकर बच्ची भावुक हो गई।
अब दिल्ली नहीं जाना चाहती हैं सोनाली
सोनाली खातून का कहना है कि वे अब कभी दिल्ली नहीं जाएंगी। उन्हें डर है कि बंग्ला बोलने के कारण दिल्ली पुलिस उन्हें दोबारा बांग्लादेशी बताकर गिरफ्तार कर सकती है। उन्होंने कहा कि जो अपमान उन्होंने झेला है उसे दोबारा नहीं झेलना चाहती हैं।
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