मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन की स्पेशल एग्जीक्यूटिव म

CJP कार्यकर्ता सौरव दास और आशुतोष रांका रिहा, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन न करने का दिया आश्वासन

Sourav Das and Ashutosh Ranka Released

नई दिल्ली: मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन की स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) अदालत ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ता सौरव दास और आशुतोष रांका को रिहा करने का आदेश दिया है। दोनों ने शांति बनाए रखने और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन नहीं करने का लिखित आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि जब तक जंतर-मंतर को कानूनी प्रक्रिया के तहत डीनोटिफाई नहीं किया जाता, तब तक वहां प्रदर्शन का आह्वान नहीं करेंगे। साथ ही, उन्होंने कहा कि भविष्य में कोई भी प्रदर्शन कानून के दायरे में किया जाएगा।

50 हजार रुपये के बॉन्ड पर रिहाई का आदेश

स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट रितु राज ने 21 अक्टूबर को आदेश दिया कि सौरव दास और आशुतोष रांका को शांति बनाए रखने से संबंधित बॉन्ड और लिखित आश्वासन देने के बाद रिहा किया जाए। अदालत ने दोनों को जांच पूरी होने तक 50,000 रुपये का व्यक्तिगत बॉन्ड और जमानतदार के बॉन्ड जमा करने का निर्देश दिया। आदेश के मुताबिक, दोनों ने आवश्यक बॉन्ड और जमानतदार प्रस्तुत कर दिए हैं। अदालत ने कहा कि जमानतदारों से पूछताछ करने और शुरुआती स्तर पर संतुष्ट होने के बाद दोनों को रिहा किया जाए। इसके लिए नई दिल्ली स्थित तिहाड़ जेल के अधीक्षक को रिलीज वारंट जारी करने का निर्देश दिया गया। अदालत ने जांच अधिकारी को अगली सुनवाई पर जमानतदारों के सत्यापन की रिपोर्ट दाखिल करने को भी कहा। साथ ही, दोनों कार्यकर्ताओं और उनके जमानतदारों को अगली सुनवाई में उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया।

शांति बनाए रखने और कानून का पालन करने की शर्त

रिहाई का आदेश देते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि दोनों कार्यकर्ताओं को प्रत्येक सुनवाई पर अदालत में पेश होना होगा। उन्हें कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक शांति बनाए रखने के साथ अपने बॉन्ड और स्वेच्छा से दिए गए लिखित आश्वासन की शर्तों का पालन करना होगा। अदालत ने कहा कि मामले की जांच कानून के अनुसार जारी रहेगी। अगली सुनवाई 23 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे निर्धारित की गई है।

दोनों कार्यकर्ताओं ने स्वेच्छा से दिया लिखित आश्वासन

सुनवाई के दौरान सौरव दास और आशुतोष रांका ने अपनी इच्छा से लिखित आश्वासन दिया। इसमें उन्होंने शांति भंग नहीं करने और न्यायपालिका तथा उसकी प्रक्रियाओं में विश्वास जताया। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि जब तक जंतर-मंतर को कानून के अनुसार डीनोटिफाई नहीं किया जाता, तब तक वहां कोई प्रदर्शन नहीं करेंगे। उन्होंने यह भी दोहराया कि भविष्य में कोई भी प्रदर्शन संवैधानिक दायरे में किया जाएगा। सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी ने दोनों कार्यकर्ताओं की न्यायिक हिरासत तीन दिन और बढ़ाने के लिए आवेदन दिया। पुलिस ने दलील दी कि उनके बाद के बयानों को देखते हुए शांति और कानून-व्यवस्था भंग होने की आशंका बनी हुई है। पुलिस की ओर से पेश वकीलों ने यह भी तर्क दिया कि दोनों कार्यकर्ताओं के अदालत में दिए गए बयान और मीडिया में दिए गए बयान एक-दूसरे से अलग थे। उन्होंने उनके पिछले व्यवहार और हालिया घटनाक्रम का हवाला देते हुए अतिरिक्त हिरासत की मांग की।

अदालत की टिप्पणी पर उठे सवालों का जवाब

दिल्ली पुलिस के वकील ने पिछली सुनवाई के बाद तिहाड़ जेल जाते समय दिए गए एक मीडिया बयान का भी जिक्र किया। पुलिस पक्ष के अनुसार, उस बयान को अदालत की गरिमा को कम आंकने वाला माना गया था। इस पर कार्यकर्ताओं के वकील ने अदालत से बिना शर्त मौखिक माफी मांगी और भरोसा दिलाया कि भविष्य में ऐसा व्यवहार दोबारा नहीं होगा। दोनों पक्षों की दलीलें और कार्यकर्ताओं के लिखित आश्वासन पर विचार करने के बाद अदालत ने माना कि मौजूदा परिस्थितियों में शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड और लिखित आश्वासन पर्याप्त हैं। अदालत ने कहा कि इस चरण पर दोनों को न्यायिक हिरासत में रखना जरूरी नहीं है। अदालत ने मामले को आगे की कार्रवाई के लिए 23 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे सूचीबद्ध किया है। अधिवक्ता अभिक चिमनी और अभिष्ट हेला ने सौरव दास तथा आशुतोष रांका की ओर से पैरवी की।

(ANI)

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