यूपी की सियासत में 'पोस्टर वॉर' तेज: सपा कार्यालय के बाहर लगे नए पोस्टर से ब्राह्मण-केवट साधने की कवायद
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। उत्तर प्रदेश की सियासत में पोस्टर वार एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। समाजवादी पार्टी (सपा) मुख्यालय के बाहर लगे एक नए और आकर्षक पोस्टर में पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव को नाव पर सवार दिखाया गया है, जिसके जरिए 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले नए सियासी समीकरण साधने की कोशिश की जा रही है।
पोस्टर पर लिखा नया सियासी समीकरण
सपा मुख्यालय के बाहर लगे इस पोस्टर पर लिखा गया है- "ब्राह्मण राह दिखाएंगे, केवट पार लगाएंगे, पीडीए की सरकार बनाएंगे।" इस पोस्टर में हिंदू पौराणिक कथाओं के उस ऐतिहासिक प्रसंग का जिक्र है जब भगवान राम को केवट ने गंगा पार कराया था। पार्टी इसके जरिए ब्राह्मणों और केवट-निषाद समुदायों को अपने पाले में लाने की बड़ी जुगत में जुटी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी अपने 'PDA' (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के दायरे को बढ़ाकर उसमें 'पीड़ित पंडित' और गैर-यादव ओबीसी नदी किनारे की जातियों (मल्लाह, निषाद, केवट) को जोड़ना चाहती है। 2024 के लोकसभा चुनावों में 37 सीटें जीतकर राज्य में सबसे बड़ी पार्टी बनने के बाद से सपा लगातार अपनी जमीनी पकड़ मजबूत करने में जुटी है।
हालिया विवाद और जवाबी होर्डिंग वार
इससे पहले 23 अक्टूबर को लखनऊ के नेशनल पीजी कॉलेज चौराहे पर एक विवादित होर्डिंग सामने आया था, जिस पर "सपाइयों का क्या भरोसा—चाय, समोसा, रसमलाई, सारे माफिया अपने भाई" जैसे तीखे कटाक्ष लिखे गए थे। इस होर्डिंग में अखिलेश यादव के साथ कुछ आपराधिक पृष्ठभूमि के नेताओं की तस्वीरें लगाई गई थीं, जिसके बाद से सत्ता पक्ष और विपक्ष में ठनी हुई है।
सत्ताधारी बीजेपी ने इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए सपा पर अपराधियों को राजनीतिक संरक्षण देने का आरोप लगाया था। यह विवाद तब और गहरा गया जब हाल ही में अखिलेश यादव रामपुर जिला जेल में वरिष्ठ नेता आजम खान से मिलने पहुंचे थे।
2027 की तैयारी और जातिगत जनगणना पर रुख
इन सबके बीच, हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने दावा किया है कि उनकी पार्टी 2027 में पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने जा रही है। उन्होंने बीजेपी के सफाए का दावा करते हुए जातिगत जनगणना और आबादी के अनुपात में आरक्षण दिए जाने की पुरजोर वकालत की।
महिलाओं के 33 प्रतिशत आरक्षण के मुद्दे पर बोलते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि बीजेपी जानबूझकर इसे लटका रही है, जबकि उनकी पार्टी ने संगठन और चुनाव में महिलाओं को एकतिहाई हिस्सेदारी देने का नियम बहुत पहले ही लागू कर दिया है। (भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
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