यूपी में वोटर लिस्ट के विशेष अभियान पर सपा ने सवाल

उत्तर प्रदेश: वोटर लिस्ट विशेष अभियान पर सियासत तेज, 2027 चुनाव से पहले सपा ने निर्वाचन आयोग से उठाए सवाल

SP questions UP voter list drive (File Photo)

लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर वोटर लिस्ट के विशेष अभियान को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। समाजवादी पार्टी ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के साथ हुई सर्वदलीय बैठक में इस पूरी प्रक्रिया की टाइमिंग और औचित्य पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी का साफ तौर पर आरोप है कि यह सारा अभियान सत्तारूढ़ दल को राजनीतिक लाभ पहुंचाने के इरादे से चलाया जा रहा है।

2027 के चुनाव से पहले उठ रहे बड़े सवाल

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर इस बैठक में शामिल हुए सपा प्रतिनिधियों ने आयोग के सामने कई बिंदु रखे। पार्टी का तर्क है कि राज्य में पहले ही 'एसआईआर' (SIR) प्रक्रिया 166 दिनों तक लंबी चलाई जा चुकी है और अब इसके बाद वोटर लिस्ट का संक्षिप्त पुनरीक्षण (Revision) भी प्रस्तावित है।

कम समय और विशेष अभियान का विरोधाभास

सपा ने तर्क दिया है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा सामान्य निर्वाचन 2027 आने में अब 100 दिनों से भी कम का वक्त बचा हुआ है। ऐसे बेहद नजदीकी चुनावी समय में इस तरह के विशेष अभियान को अचानक से शुरू करने की कोई ठोस या व्यावहारिक आवश्यकता नजर नहीं आती है, जिससे इसकी निष्पक्षता पर संदेह पैदा होता है।

सपा ने रखीं पारदर्शी व्यवस्था की मांगें

बैठक के दौरान सिर्फ विरोध ही नहीं जताया गया, बल्कि चुनाव प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरतने के लिए कई अहम मांगें भी रखी गईं। समाजवादी पार्टी ने मांग की है कि बूथ लेवल अधिकारियों यानी बीएलओ (BLO) के नाम और उनके मोबाइल नंबरों की आधिकारिक सूची तुरंत बूथ लेवल एजेंटों (BLA) को मुहैया कराई जाए।

बीएलओ की कार्यप्रणाली पर कड़े निर्देश की मांग

पार्टी ने यह भी कहा है कि बीएलओ द्वारा जिन भी मतदाताओं को चिन्हित किया जाए, उसकी दैनिक सूची बीएलए को दी जाए। इसके अलावा, जब भी बीएलओ फील्ड भ्रमण या सत्यापन के लिए जाएं, तो उसकी पूर्व सूचना संबंधित बीएलए को अवश्य दी जानी चाहिए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

बूथ-वार सूचियों और फॉर्म 6 पर जोर

सपा प्रतिनिधियों ने निर्वाचन आयोग के सामने यह मांग भी रखी कि सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को हर हफ्ते बूथ-वार और विधानसभा-वार ये सूचियां लगातार उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही, निरंतर पुनरीक्षण के स्थापित नियमों का पालन करते हुए 'फॉर्म 6' को ईआरओ (ERO) के नोटिस बोर्ड पर अनिवार्य रूप से प्रदर्शित किया जाए।

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