बबुरी के अशोक इंटर कॉलेज में एक्सपायर दवाओं का जखीरा मिलने से हड़कंप, वीडियो वायरल
चंदौली,(उत्तर प्रदेश)। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो ने बबुरी स्थित अशोक इंटर कॉलेज को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। वायरल वीडियो में विद्यालय परिसर के एक बंद कमरे में बड़ी मात्रा में एक्सपायर हो चुकी दवाएं रखी दिखाई दे रही हैं। दवाओं पर वर्ष 2024 और 2025 की एक्सपायरी डेट अंकित होने का दावा किया जा रहा है। वीडियो सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है और पूरे मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं।
दवाएं लंबे समय से विद्यालय परिसर में रखी थी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, वायरल वीडियो में दवाओं के कई कार्टन और पैकेट दिखाई दे रहे हैं। दावा है कि ये दवाएं लंबे समय से विद्यालय परिसर में रखी थीं। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है, कि ये दवाएं विद्यालय तक कैसे पहुंचीं और एक्सपायर होने के बाद भी उनका सुरक्षित निस्तारण क्यों नहीं किया गया।
सीएमओ बोले- जांच के बाद दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) चंदौली ने कहा, कि उन्हें मामले की जानकारी मीडिया और वायरल वीडियो के माध्यम से मिली है, उन्होंने तत्काल जांच टीम गठित करने के निर्देश दिए हैं। जांच में यह पता लगाया जाएगा, कि दवाएं किस विभाग से आईं, विद्यालय में किसके निर्देश पर रखी गईं और एक्सपायर होने के बाद उनका नियमानुसार निस्तारण क्यों नहीं किया गया। यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया, कि नियमानुसार एक्सपायर दवाओं का बायो-मेडिकल वेस्ट के तहत सुरक्षित निस्तारण किया जाना चाहिए। इन्हें लंबे समय तक किसी कमरे में रखना नियमों के विरुद्ध है।
नए होने के कारण मामला संज्ञान में नहीं था, कराई जाएगी जांच
जिला विद्यालय निरीक्षक धर्मेंद्र कुमार ने कहा, कि वह अभी जिले में नए हैं और यह मामला उनके संज्ञान में नहीं आया था। उन्होंने बताया, कि नवनियुक्त प्रधानाचार्य से पूरे प्रकरण की जानकारी लेकर जांच कराई जाएगी। यदि जांच में किसी की लापरवाही सामने आती है तो दोषियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।
नई प्रबंध समिति का गठन न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप होगा
डीआईओएस ने विद्यालय की नई प्रबंध समिति के गठन को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा, कि न्यायालय के निर्देशों के अनुसार जब तक सभी आवश्यक कागजी प्रक्रियाएं पूरी नहीं हो जातीं, तब तक नई समिति का गठन नहीं किया जा सकता। पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता के साथ और न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप ही पूरी की जाएगी।
प्रबंधन की चुप्पी से बढ़े सवाल
मामले में जब विद्यालय प्रबंधन से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। वहीं, नवनियुक्त प्रधानाचार्य ने कहा कि उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है। प्रबंधन की चुप्पी ने पूरे मामले को और अधिक सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है।
अभिभावकों में चिंता, निष्पक्ष जांच की मांग
विद्यालय में एक्सपायर दवाओं के मिलने और वायरल वीडियो सामने आने के बाद अभिभावकों में चिंता और नाराजगी है। उनका कहना है, कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े इस मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।
जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाई
फिलहाल पूरे मामले में कई सवाल बने हुए हैं। आखिर इतनी बड़ी मात्रा में दवाएं विद्यालय में कैसे पहुंचीं? क्या ये किसी सरकारी योजना के तहत आई थीं? एक्सपायर होने के बाद इन्हें नष्ट क्यों नहीं किया गया? इन सभी सवालों के जवाब अब प्रशासनिक जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे। फिलहाल क्षेत्रवासियों और अभिभावकों की निगाहें जांच रिपोर्ट और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
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