भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए नियमों को मजबूत करना और बाजार सुधार जरूरी: राजीव गाबा
नई दिल्ली [भारत]: पूर्व कैबिनेट सचिव और नीति आयोग के सदस्य राजीव गाबा ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए कड़े नियमन, बाजार-उन्मुख सुधारों और संस्थागत क्षमता निर्माण की जरूरत पर जोर दिया है।
वैश्विक अस्थिरता के बीच ऊर्जा सुरक्षा पर जोर
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी) के 20वें स्थापना दिवस पर अपने संबोधन में गाबा ने कहा कि घरेलू हाइड्रोकार्बन क्षेत्र बढ़ती वैश्विक अस्थिरता और आपूर्ति जोखिमों के बीच काम कर रहा है। नीति आयोग की एक विज्ञप्ति के अनुसार, गाबा ने कहा कि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस क्षेत्र भू-राजनीतिक तनाव, आपूर्ति में व्यवधान और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े जोखिमों वाले तेजी से जटिल होते वैश्विक वातावरण में काम कर रहा है।
उदारीकरण से बदली ऊर्जा क्षेत्र की दिशा
भारत की नीतिगत दिशा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र औपनिवेशिक काल के नियमों और राज्य नियंत्रण से निकलकर 1990 के बाद धीरे-धीरे उदारीकरण की ओर बढ़ा है। इस बदलाव के तहत प्रशासित मूल्य निर्धारण तंत्र को समाप्त किया गया और बाजार को अधिक खुला बनाया गया। गाबा ने 2006 में पीएनजीआरबी की स्थापना को निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा, निवेशकों के विश्वास और उपभोक्ता हितों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण संस्थागत कदम बताया।
पाइपलाइन ढांचे के विस्तार पर जोर
उन्होंने नियामक द्वारा दो दशकों में विकसित किए गए डाउनस्ट्रीम प्राकृतिक गैस पाइपलाइन ढांचे का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कॉमन कैरियर और कॉन्ट्रैक्ट कैरियर के सिद्धांतों ने बुनियादी ढांचे तक खुली पहुंच सुनिश्चित करने में मदद की है। गाबा ने कहा कि इस तरह का नियामक काम अक्सर सीधे दिखाई नहीं देता, लेकिन पूर्वानुमानित बाजार बनाने, निवेशकों का विश्वास बढ़ाने और जनता का भरोसा मजबूत करने के लिए यह जरूरी है।
घरेलू ऊर्जा क्षमता बढ़ाने की जरूरत
भविष्य की ऊर्जा जरूरतों पर चर्चा करते हुए गाबा ने कहा कि औद्योगीकरण, शहरीकरण और जीवन स्तर में सुधार के कारण ऊर्जा की मांग बढ़ेगी। ऐसे में घरेलू ऊर्जा आपूर्ति और क्षमता का विस्तार जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों के मद्देनजर घरेलू ऊर्जा क्षमता का विविधीकरण और विस्तार दीर्घकालिक रणनीति के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।
सीमावर्ती और गहरे पानी वाले क्षेत्रों में खोज पर जोर
गाबा ने कहा कि ऊर्जा मांग में संभावित वृद्धि को देखते हुए घरेलू अन्वेषण और उत्पादन में तेजी लाने की जरूरत है। इसके लिए तकनीक, निजी निवेश और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की क्षमताओं का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से सीमावर्ती और गहरे पानी वाले क्षेत्रों में अन्वेषण और उत्पादन को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
गैस आधारित अर्थव्यवस्था के लिए एकीकृत ढांचा
उन्होंने कहा कि गैस आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बदलाव को तेज करने के लिए एक एकीकृत मूल्य श्रृंखला जरूरी है। इसमें सिटी गैस वितरण नेटवर्क का विस्तार, द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) टर्मिनलों के उपयोग में सुधार और राष्ट्रीय गैस ग्रिड को मजबूत करना शामिल है।
नए ऊर्जा क्षेत्रों के अनुरूप हों नियम
गाबा ने कहा कि नियामक सुधारों को जारी रखते हुए अनावश्यक बाधाओं को हटाया जाना चाहिए। साथ ही, नियामक ढांचे को हाइड्रोजन, सिंथेटिक गैस और कार्बन डाइऑक्साइड पाइपलाइनों जैसे उभरते क्षेत्रों के साथ तालमेल बनाए रखना होगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में नियामक नियमों को बुनियादी सार्वजनिक सुरक्षा उपायों को कमजोर किए बिना नए कारोबारी समझौतों के अनुरूप ढालना होगा।
सुरक्षा और उपभोक्ता संरक्षण सर्वोपरि
गाबा ने जोर दिया कि सुरक्षा और उपभोक्ता संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके साथ ही नियमों को तकनीकी बदलाव और नए कारोबारी मॉडलों के साथ विकसित होते रहना चाहिए। उन्होंने पीएनजीआरबी के आगे के कामकाज के लिए पूर्वानुमानशीलता, सुधारों की गति और कारोबार करने में सुगमता को प्रमुख सिद्धांत बताया। उन्होंने कहा कि नियामकों की जिम्मेदारी है कि वे व्यापक राष्ट्रीय उद्देश्यों के अनुरूप रहते हुए निष्पक्ष तरीके से काम करें।
(एएनआई)
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