ई-लाइब्रेरी के माध्यम से लंदन-न्यूयॉर्क का पाठ्यक्रम समझ रहे छात्र
MP News : छतरपुर। महाराजा महाविद्यालय का विलय करके महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय बनने से संस्थान का विकास हुआ है। साथ ही पढऩे वाले छात्रों में भी समय के साथ बदलाव देखने को मिल रहा है। अब यहां छात्रों की रुचि को देखते हुए विवि प्रबंधन ने ई-लाइब्रेरी की शुरुआत की थी। नए सत्र में छात्र-छात्राएं डिजिटल माध्यम से अपनी पढ़ाई कर रहे हैं। लाइब्रेरी में विदेशी पाठ्यक्रम से भी छात्रों को अवगत कराया जा रहा है। इसके लिए लंदन, न्यूयॉर्क, हॉवर्ड यूनिवर्सिटी जैसी संस्थाओं का सेलेबस यहां से पढ़ सकते हैं।
इसके लिए लाइब्रेरी ने डेलनेट नाम की संस्था से अनुबंध किया है, जो बच्चों को विदेशी उपक्रम से जोड़ रहे हैं। इसके अलाव छात्रों को विवि की 161 साल पुरानी पुस्तकों से रूबरू किया जा रहा है। संस्था डेलनेट ने विवि को मेंबरशिप उपलब्ध कराई है, जिससे छात्रों को अब विश्व के जाने माने संस्थानों का पाठ्यक्रम और वहां की चर्चित किताबों को पढ़ने का मौका मिल रहा है।
161 साल पुरानी किताबें भी मौजूद
सुबह 11 बजे से शाम पांच बजे तक इस लाइब्रेरी में छात्र अपने भविष्य की उड़ानों को पंख दे रहे हैं। महाराजा कॉलेज की स्थापना 1865 में हुई थीं और उस समय की पुस्तकें भी विवि में मौजूद हैं। विगत समय से लेकर वर्तमान में विश्वविद्यालय में करीब सवा लाख पुस्तकें हैं, जो डिजिटल कल्चर के रुझान से प्रभावित हो रही हैं। डिजिटल लर्निंग ने इन पुस्तकों को दरकिनार कर दिया है। अब छात्रों फ्री वाईफाई सुविधा और सीसीटीवी कैमरो से लैस लेब में अध्ययन कर रहे हैं।
ब्रिटिश समय की पुस्तकें भी मौजूद
विवि के संग्रहालय कक्ष में कॉलेज स्थापना के समय से लेकर वर्तमान शिक्षा नीति को मिलाकर करीब सवा लाख किताबें रखी गई हैं। इन किताबों में वर्ष 1865 की कुछ पुस्तकें भी हैं जिनकी कीमत उस समय की मुद्रा के अनुसार तीन पैसे या चार पैसे की हैं, वहीं नयी शिक्षा नीति की किताब भी विवि में उपलबध हैं। डिजिटल लर्निंग का विकास होने से अब छात्रों ने कंप्यूटर की तरफ रुख किया है। वे अब ई -लाइब्रेरी के माध्यम से अपना चर्हुंमुखी विकास कर रहे हैं।
विश्वविद्यालय में दो लाइब्रेरी और विभागीय लाइब्रेरी हैं। जहां पर समय के साथ-साथ शिक्षा नीति में बदलाव के कारण प्रकाशित किताबें हैं जिनकी संख्या अब सवा लाख हो गई है। ई-लाइब्रेरी के चलन ने इन किताबों को कहीं न कहीं पीछे ढकेल दिया है। बच्चों में कम रुझान की वजह से पुरानी किताबों को स्टोर रूम में शिफ्ट किया जा रहा है।
ई-लाइब्रेरी में 134 केबिन
विवि में जो ई-लाइब्रेरी बनाई गई हैं, उसमें दो कक्ष हैं। छात्राओं को अलग व छात्रों को अलग कक्ष दिए गए हैं। इनमें समान रूप से 134 केबिन हैं जिनमें फ्री इंटरनेट सुविधा है। वातानुकूलित कमरे में छात्र अपनी पढ़ाई कर रहे हैं। लाइब्रेरी में सभी छात्रों को आईडी पासवर्ड दिया जाता है, जिसे घर पर भी चालू कर सकते हैं। लाइब्रेरियन अनिल कुमार ने बताया कि सुबह ग्यारह बजे से शाम पांच बजे तक केवल विवि के छात्रों को लाइब्रेरी में प्रवेश दिया जाता है। विवि का पहचान पत्र और यूनिफॉर्म आवाश्यक होता है। वर्तमान में दो बैच चल रही हैं जिसमें पहली बैच में 80 और दूसरी बैच में 70 छात्र पढ़ाई कर रहे हैं।
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