सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि चुनाव आयोग की ओर स

SIR पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, वोटरों पर ईआरओ ही लेंगे अंतिम निर्णय

Supreme Court Clarifies ERO’s Final Authority in SIR Process

कोलकाता। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि चुनाव आयोग की ओर से किए जा रहे SIR सुचारू ढंग से पूरा हो और इसमें राज्य सरकार चुनाव आयोग की सहायता करें। पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त किए गए माइक्रो ऑब्जर्वर वोटरों के संबंधित कोई भी निर्णय नहीं कर सकेंगे। वोटरों के बारे में ईआरओ ही निर्णय लेंगे और उनका ही निर्णय फाइनल होगा। चुनाव आयोग ईआरओ या एईआरओ में फेरबदल कर सकता है।

8505 अधिकारियों को ईआरओ के साथ रिपोर्टिंग

राज्य सरकार की ओर से दिए गए 8505 अधिकारियों को मंगलवार शाम तक ईआरओ के पास रिपोर्टिंग करना है। वोटरों की सुनावाई में माध्यिम परीक्षा के एडमिट कार्ड को मान्य माना जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने स्क्रूटनी के लिए और 7 दिन का समय बढ़ा दिया है। फाइनल वोटर लिस्ट कब प्रकाशित हो पाएगा, इस बारे में चुनाव आयोग ने दो दिन का समय लिया है। राज्य में कानून व्यवस्था को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने डीजीपी को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।

ममता बनर्जी की याचिका पर हुई कई चरणों में सुनवाई

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक साधारण व्यक्ति के तौर पर सुप्रीम कोर्ट में SIR की वजह से बीएलओ समेत 100 से ज्यादा वोटरों की मौत की घटनाओं, दूसरें राज्यों से अधिकारियों को लाकर माइक्रो ऑब्जर्वर के रूप में नियुक्ति, सरनेम, ठिकाना आदि के नाम पर बड़ी संख्या में वोटरों के नाम काटने जैसे मुद्दों को लेकर मामला दर्ज कराया था और उसकी पहली सुनवाई 4 फरवरी को हुई थी। फिर 9 फरवरी की सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए निर्देशों में कुछ निर्देश ममता बनर्जी के पक्ष में और कुछ निर्देश चुनाव आयोग के पक्ष में गए।

माइक्रो ऑब्जर्वर की भूमिका पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

चुनाव आयोग की ओर से दूसरे राज्यों के अधिकारियों को माइक्रो ऑब्जर्वर के रूप में नियुक्ति की गई थी। माइक्रो ऑब्जर्वर की ओर से ईआरओ और एईआरओ के कार्य में हस्तक्षेप वोटरों के बारे में निर्णय किया जा रहा था। ममता बनर्जी को दूसरे राज्यों के अधिकारियों को माइक्रो ऑब्जर्वर के रूप में नियुक्ति और उनके कार्यकलापों पर घोर आपत्ति थी। चुनाव आयोग के मैनुअल में एसआईआर में माइक्रो ऑब्जर्वर की किसी भूमिका का उल्लेख नहीं होने कारण सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि माइक्रो ऑब्जर्वर कोई निर्णय नहीं कर सकते। वे ईआरओ की मदद कर सकते है।

राज्य सरकार के अधिकारी केवल सहायता करेंगे

राज्य सरकार की ओर से दिए गए 8505 अधिकारी भी ईआरओ की सहायता ही करेंगे। वोटरों के बारे में ईआरओ ही निर्णय लेगे और उनका निर्णय ही मान्य होगा। चुनाव आयोग ईआरओ में फेरबदल कर सकता है। चुनाव आयोग सरकार की ओर से दिए गए 8505 अधिकारियों में से किसी अधिकारी को बदल सकता है और उसके बदले सरकार से किसी दूसरे अधिकारी को ले सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने स्क्रूटनी के लिए 7 दिन का समय बढ़ाने का दिया निर्देश

ममता बनर्जी के वकील की ओर से सुप्रीम कोर्ट को ध्यान खींचा गया कि चुनाव आयोग को 14 फऱवरी तक फाइनल वोटर लिस्ट प्रकाशित करना है। उसके प्रकाशित होने पर सुनवाई के लिए बचे हुए वोटरों का क्या होगा। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्क्रूटनी के लिए सात दिन का समय बढ़ाने का निर्देश दिया। चुनाव आयोग फाइनल वोटर लिस्ट प्रकाशित करने के बारे में जानकारी देने के लिए दो दिन का समय मांगा है।

कानून व्यवस्था पर डीजीपी से हलफनामा दाखिल करने के आदेश

चुनाव आयोग ने यह मुद्दा उठाया कि उसने कुछ अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया था, लेकिन उनके खिलाफ FIR दर्ज नहीं हुआ। इस पर चुनाव आयोग ने राज्य के डीजीपी को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।

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