सुप्रीम कोर्ट ने स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) मरी

SMA मरीजों के महंगे इलाज के लिए स्थायी फंडिंग सिस्टम पर सुप्रीम कोर्ट का जोर

SC ने समर्पित कोष बनाने का प्रस्ताव मांगा

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) के मरीजों के इलाज के अत्यधिक खर्च को पूरा करने के लिए एक स्थायी वित्तपोषण तंत्र की आवश्यकता पर बल दिया। कोर्ट ने कहा कि जीवन रक्षक उपचारों तक उनकी पहुंच छिटपुट दान या एकमुश्त सरकारी अनुदान पर निर्भर नहीं रह सकती। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता और एमिकस क्यूरी अपराजिता सिंह को एक समर्पित कोष के लिए एक व्यापक प्रस्ताव तैयार करने को कहा, जो नियमित रूप से योगदान प्राप्त कर सके और मरीजों को निरंतर वित्तीय सहायता प्रदान कर सके।

सुप्रीम कोर्ट ने स्थायी फंडिंग सिस्टम पर दिया जोर

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, हमें एक नियमित चैनल, एक स्थायी प्रणाली की आवश्यकता है। साथ ही एक स्वचालित और निरंतर रूप से बनाए रखने योग्य वित्तपोषण तंत्र की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रस्तावित ढांचे में कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) पहलों, संस्थागत दानदाताओं और केंद्र सरकार से प्राप्त होने वाले वित्तपोषण की जांच की जाएगी। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि कोष का प्रबंधन पूरी तरह से गैर-लाभकारी आधार पर किया जाना चाहिए और संसाधनों को मरीजों के अधिकतम लाभ के लिए निर्देशित किया जाना चाहिए।

SMA मरीजों के इलाज के लिए फंड बनाने की तैयारी

सुप्रीम कोर्ट स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (एसएमए) से पीड़ित लोगों के लिए पर्याप्त और किफायती उपचार सुविधाओं की कमी से संबंधित एक मामले की सुनवाई कर रहा है। एसएमए एक दुर्लभ आनुवंशिक विकार है, जिसके उपचारों पर करोड़ों रुपये खर्च हो सकते हैं। अपने आदेश में बेंच ने सिंह को एक समर्पित कोष बनाने के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत करने को कहा है। उन्हें इस प्रस्ताव को रिकॉर्ड पर रखने के लिए चार सप्ताह का समय दिया गया है। 

(इनपुट: ANI)

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