मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर को

सुप्रीम कोर्ट ने दिए भोजशाला में 23 जनवरी को पूजा व नमाज़ दोनों का इंतजाम करने के निर्देश

Supreme Court Orders Both Puja and Namaz at Bhojshala on January 23

नई दिल्ली/धार। मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर को लेकर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। वसंत पंचमी के अवसर पर 23 जनवरी को पूजा-अर्चना की अनुमति को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने प्रशासन को निर्देश दिया है कि उस दिन परिसर में पूजा और नमाज़—दोनों के लिए समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

कानून-व्यवस्था और सौहार्द बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था और आपसी सौहार्द बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है। अदालत ने कहा कि किसी भी पक्ष की धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुंचे और दोनों समुदायों को शांतिपूर्ण ढंग से अपने-अपने धार्मिक अनुष्ठान करने का अवसर मिले, यह प्रशासन सुनिश्चित करे।

कोर्ट में दोनों पक्षों की दलील

हिंदू पक्ष की ओर से याचिका में वसंत पंचमी पर सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा की अनुमति देने की मांग की गई थी। वहीं मुस्लिम पक्ष की ओर से परंपरागत रूप से शुक्रवार की नमाज़ के अधिकार का हवाला दिया गया। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद संतुलित रुख अपनाते हुए दोनों धार्मिक गतिविधियों के आयोजन के निर्देश दिए।

राज्य प्रशासन व जिला अधिकारी आवश्यक कदम उठाएं

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य प्रशासन और जिला अधिकारियों को सुरक्षा व्यवस्था, समय प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण को लेकर आवश्यक कदम उठाने को कहा है, ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था या तनाव की स्थिति उत्पन्न न हो।

मामला न्यायालय के विचाराधीन

उल्लेखनीय है कि भोजशाला परिसर को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है और यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है। अदालत ने दोहराया कि अंतिम निर्णय होने तक शांति और कानून व्यवस्था सर्वोपरि है।

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