सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम, विरोध स्थलों पर फेस रिकग्निशन और बायोमेट्रिक निगरानी के खिलाफ याचिका पर सुनवाई को तैयार
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को विरोध प्रदर्शन स्थलों पर पुलिस द्वारा चेहरे की पहचान तकनीक और अन्य बायोमेट्रिक निगरानी उपकरणों के इस्तेमाल को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताई। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची तथा वी. मोहना की पीठ ने याचिका को छात्र प्रदर्शनों से संबंधित अन्य लंबित याचिकाओं के साथ जोड़ दिया।
छात्र प्रदर्शनों से जुड़ी है याचिका
केरल से सीपीआई (एम) के राज्यसभा सांसद ए. ए. रहीम की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शन स्थलों पर पुलिस ने चेहरे की मैपिंग के साथ-साथ वाहन आधारित निगरानी तकनीक का इस्तेमाल किया। याचिका के मुताबिक, लोगों का डेटा उनकी अनुमति के बिना एकत्र किया गया और बाद में दो निजी संस्थाओं द्वारा संग्रहीत किया गया।
बिना सहमति डेटा जुटाने का आरोप
रहीम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने दलील दी कि चेहरे की मैपिंग के लिए चश्मे और डेटा संग्रह के लिए निगरानी वाहन का इस्तेमाल किया गया। उनका कहना है कि लोगों का डेटा बिना सहमति के लिया गया और निजी संस्थाओं के पास रखा गया, जो कथित तौर पर डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के प्रावधानों का उल्लंघन है।
जंतर-मंतर पर निगरानी का मामला
याचिका दिल्ली पुलिस द्वारा जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की निगरानी के लिए कथित तौर पर डिजिटल निगरानी उपकरणों के इस्तेमाल से जुड़ी है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि दिल्ली पुलिस ने बिना पर्याप्त वैधानिक आधार के प्रदर्शनकारियों की बायोमेट्रिक निगरानी की।
CCTV और ड्रोन के इस्तेमाल का आरोप
याचिका में दावा किया गया है कि दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों, पत्रकारों और अन्य लोगों की तस्वीरें लेने और उन्हें प्रोसेस करने के लिए CCTV कैमरों, ड्रोन, मोबाइल कमांड-एंड-कंट्रोल वाहन और अन्य निगरानी उपकरणों का इस्तेमाल किया। याचिकाकर्ता का तर्क है कि मौजूदा कानून शांतिपूर्ण सार्वजनिक सभाओं में इस तरह की व्यापक बायोमेट्रिक पहचान को अधिकृत नहीं करता है।
निजता के अधिकार का दिया हवाला
याचिका में कहा गया है कि विरोध स्थल पर निगरानी का पैमाना और तरीका संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत निजता, जीवन और गरिमा के अधिकार का उल्लंघन करता है। याचिका में केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस आयुक्त, राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो और दो निजी कंपनियों—आदित्य इन्फोटेक लिमिटेड तथा डायमेंशन एनएक्सजी प्राइवेट लिमिटेड—को प्रतिवादी बनाया गया है।
सुप्रीम कोर्ट में पहले से लंबित हैं कई याचिकाएं
जंतर-मंतर पर हुए हालिया छात्र प्रदर्शनों को लेकर प्रदर्शनकारियों, पत्रकारों और मौके पर मौजूद अन्य लोगों की कथित डिजिटल और बायोमेट्रिक निगरानी का मुद्दा सामने आया है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पहले से कई याचिकाएं लंबित हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अब बायोमेट्रिक और चेहरे की पहचान आधारित निगरानी को चुनौती देने वाली इस याचिका को भी संबंधित मामलों के साथ जोड़ दिया है।
(एएनआई)
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