भोपाल में सवा लाख आवारा कुत्तों पर सुप्रीम फैसला, हिंसक व रेबीज संक्रमित श्वानों को इच्छामृत्यु दें.
भोपाल/नई दिल्ली। देशभर में लगातार बढ़ रहे आवारा कुत्तों के आतंक और डॉग बाइट की घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद कड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट के इस आदेश के बाद भोपाल सहित देश के तमाम शहरों में आम जनता और 'डॉग लवर्स' के बीच बना डर का माहौल कम होने की उम्मीद है। साथ ही, अब तक सुस्त पड़े नगर निगम प्रशासन को भी अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करना होगा।
हिंसक कुत्तों को दिया जा सकेगा इंजेक्शन
सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की पीठ (जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया) ने साफ किया है कि यदि कोई आवारा कुत्ता अत्यधिक आक्रामक, हिंसक, लाइलाज बीमारी से पीड़ित या रेबीज से संक्रमित पाया जाता है, तो उसे निर्धारित मेडिकल प्रोटोकॉल के तहत इंजेक्शन देकर समाप्त (इच्छामृत्यु/Euthanasia) किया जा सकता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविधान का अनुच्छेद 21 नागरिकों को बिना किसी डर के गरिमा के साथ जीने और सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षित घूमने का अधिकार देता है। बच्चों, बुजुर्गों और आम जनता की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने यह कदम उठाया है।
भोपाल में चिंताजनक स्थिति, सवा लाख आवारा श्वानों का है आतंक
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आवारा कुत्तों की आबादी इस समय सवा लाख (1,25,000) से अधिक पहुंच चुकी है। इसके मुकाबले नगर निगम की नसबंदी (Sterilization) रफ्तार बेहद धीमी है। आंकड़ों के अनुसार, भोपाल नगर निगम हर साल केवल 20 से 25 हजार कुत्तों की ही नसबंदी कर पाता है, जो इनकी बढ़ती आबादी को रोकने के लिए नाकाफी साबित हो रहा है। इस सुस्ती के कारण शहर की सड़कों, पार्कों और कॉलोनियों में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ रहा था।
सार्वजनिक स्थानों से हटाए जाएंगे कुत्ते
सुप्रीम कोर्ट ने डॉग लवर्स और पशु कल्याण संगठनों (NGOs) की उन याचिकाओं को खारिज कर दिया है, जिसमें पूर्व के आदेशों को बदलने की मांग की गई थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नवंबर 2025 के निर्देश जारी रहेंगे। स्कूलों, अस्पतालों, रेलवे स्टेशनों, बस स्टैंडों और राष्ट्रीय राजमार्गों जैसे अधिक भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक संस्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने के निर्देश सख्ती से लागू रहेंगे। नसबंदी या टीकाकरण के बाद कुत्तों को वापस इन संवेदनशील और शैक्षणिक संस्थानों के परिसर में नहीं छोड़ा जा सकता।
स्थानीय अधिकारियों को मिलेगी सुरक्षा
अक्सर देखा जाता है कि जब नगर निगम या स्थानीय प्रशासन की टीमें आवारा कुत्तों को पकड़ने जाती हैं, तो कुछ लोग या संस्थाएं उनके काम में बाधा डालती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अब अधिकारियों को बड़ी राहत देते हुए निर्देश दिया है कि कानूनी रूप से अपनी ड्यूटी करने वाले नगर निगम कर्मचारियों या अधिकारियों के खिलाफ आसानी से FIR या आपराधिक मामले दर्ज नहीं किए जाएंगे। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को हर जिले में कम से कम एक चालू एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) सेंटर स्थापित करने के आदेश दिए गए हैं। सरकारी अस्पतालों में एंटी-रेबीज वैक्सीन और दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है।
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