टाटा ट्रस्ट्स ने रविवार को कहा कि टाटा संस के अध्य

चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति पर टाटा ट्रस्ट्स ने उठाए सवाल, प्रस्ताव को बताया अमान्य

Tata Trusts raises questions on N. Chandrasekaran reappointment

नई दिल्ली: टाटा ट्रस्ट्स ने रविवार को कहा कि टाटा संस के अध्यक्ष के रूप में एन चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति का प्रस्ताव कंपनी की 17 सितंबर को हुई बोर्ड बैठक में वैध रूप से पारित नहीं हुआ। ट्रस्ट्स के मुताबिक, प्रस्ताव को टाटा ट्रस्ट्स द्वारा नामित निदेशकों का अनिवार्य समर्थन नहीं मिला।

टाटा ट्रस्ट्स के नामित निदेशकों का समर्थन जरूरी

टाटा ट्रस्ट्स के अनुसार, टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन (AoA) के तहत टाटा ट्रस्ट्स द्वारा नामित निदेशकों के बहुमत का सकारात्मक समर्थन आवश्यक है। टाटा ट्रस्ट्स की कंपनी में लगभग 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है। बोर्ड में टाटा ट्रस्ट्स के दो नामित निदेशकों के साथ, AoA के तहत इस शर्त को पूरा करने के लिए दोनों निदेशकों का प्रस्ताव के पक्ष में मतदान करना जरूरी था।

एक निदेशक ने प्रस्ताव के खिलाफ दिया वोट

ट्रस्ट्स ने कहा कि 17 सितंबर को दो नामित निदेशकों में से एक ने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया। इसके चलते प्रस्ताव के लिए आवश्यक सकारात्मक समर्थन नहीं मिल सका। ट्रस्ट्स ने यह भी कहा कि अध्यक्ष के निर्णायक मत का इस्तेमाल इस शर्त की कमी को पूरा करने के लिए नहीं किया जा सकता।

‘कोई गतिरोध नहीं था’

टाटा ट्रस्ट्स के मुताबिक, अध्यक्ष का निर्णायक मत केवल समग्र बोर्ड स्तर पर मतों की समानता की स्थिति में उपलब्ध होता है और टाटा ट्रस्ट्स द्वारा नामित निदेशकों से जुड़ी इस विशेष आवश्यकता पर लागू नहीं होता। ट्रस्टों ने कहा, “कोई गतिरोध या गतिरोध नहीं था। बोर्ड ने एक प्रश्न पूछा, और एओए ने उसका नकारात्मक उत्तर दिया।”

साइरस मिस्त्री मामले का भी दिया हवाला

ट्रस्टों ने टाटा संस के पूर्व अध्यक्ष साइरस मिस्त्री को हटाने से संबंधित सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही का भी हवाला दिया। उन्होंने तर्क दिया कि टाटा संस ने पहले अनुच्छेद 104बी और 121 के तहत ट्रस्टों के नामित निदेशकों के सकारात्मक मतदान अधिकारों का बचाव किया था। राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण ने इन अधिकारों को दमनकारी माना था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने टाटा संस के पक्ष को स्वीकार करते हुए उस फैसले को रद्द कर दिया था। टाटा ट्रस्ट्स ने कहा कि टाटा संस अब उन सुरक्षा उपायों की अनदेखी नहीं कर सकता, जिनका उसने पहले सुप्रीम कोर्ट के समक्ष बचाव किया था।

लिस्टिंग से जुड़े तर्क को भी किया खारिज

टाटा ट्रस्ट्स ने इस तर्क को भी खारिज किया कि टाटा संस को सूचीबद्ध करना उसके कॉर्पोरेट गवर्नेंस को मजबूत करने के लिए जरूरी होगा। ट्रस्ट्स ने स्वतंत्र निदेशकों, लेखापरीक्षा और नामांकन समितियों, संबंधित पक्ष लेनदेन, रोटेशन द्वारा निदेशकों की सेवानिवृत्ति और इनसाइडर ट्रेडिंग से जुड़े मौजूदा प्रावधानों का हवाला दिया। ट्रस्ट्स ने कहा कि इन गवर्नेंस मानकों को टाटा संस ने मौजूदा विवाद सामने आने से पहले ही स्वेच्छा से अपनाया था।

(एएनआई)

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