‘एक कचौरी दो समोसा, शिक्षा मंत्री का क्या भरोसा?’ भोपाल में शिक्षक अभ्यर्थियों का प्रदर्शन
भोपाल (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश शिक्षक भर्ती परीक्षा के अभ्यर्थियों ने गुरुवार को भोपाल के रोशनपुरा चौक पर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी राज्य में द्वितीय और तृतीय श्रेणी के शिक्षकों के पदों की संख्या बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। इस दौरान अभ्यर्थियों ने राज्य सरकार और शिक्षा मंत्री के खिलाफ नारेबाजी करते हुए भर्ती में रिक्तियों की संख्या बढ़ाने के पहले दिए गए आश्वासनों को पूरा करने की मांग की। बात करते हुए अभ्यर्थी नरेंद्र राजपूत ने कहा कि उम्मीदवार 17 नवंबर, 2025 से परिणाम घोषित होने से पहले ही प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया। राजपूत ने कहा, "हम 17 नवंबर से लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं - परिणाम घोषित होने से पहले ही। उस समय हमारी चिंताओं को अनसुना कर दिया गया था। 6 जनवरी को हमने एक ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शन किया था - मध्य प्रदेश की सड़कों पर अब तक के सबसे बड़े प्रदर्शनों में से एक - जिसमें हजारों शिक्षक बनने की इच्छा रखने वाले उम्मीदवार इसी सड़क पर जमा हुए थे। उस समय हमें आश्वासन दिया गया था कि पदों की संख्या बढ़ाई जाएगी, लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ।"
पदोन्नति का हवाला देकर उठाए सवाल
राजपूत ने पिछले भर्ती चक्रों और दूसरे राज्यों में हुई पदोन्नतियों का हवाला देते हुए कहा कि मध्य प्रदेश सरकार को भी शिक्षक भर्ती में पदों की संख्या बढ़ाने पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा, "हमने सबूत पेश किए हैं कि परिणाम घोषित होने के बाद पदोन्नतियां हुईं। 2022 में आपने 23 लोगों को पदोन्नत किया। 2018 में आपने 22 लोगों को पदोन्नत किया। हाल ही में उत्तर प्रदेश में भी घोषित पदों पर पदोन्नतियां हुईं। पदोन्नतियां हर जगह हो रही हैं। आप क्या कर रहे हैं?" अभ्यर्थी ने स्पष्ट किया कि वे अतिथि शिक्षकों के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण का विरोध नहीं कर रहे हैं, बल्कि उनका कहना है कि विज्ञापन में पदों की संख्या उसी के अनुरूप तय की जानी चाहिए थी। उन्होंने भर्ती अधिसूचना में पदों की संख्या बढ़ाने या घटाने की अनुमति देने वाले प्रावधान का भी उल्लेख किया और सरकार से अपनी मांगों पर लिखित जवाब देने की अपील की। राजपूत ने कहा, "अगर शिक्षा मंत्री स्पष्ट रूप से कहते हैं कि वे पदों की संख्या नहीं बढ़ा सकते, तो हम विरोध प्रदर्शन छोड़ देंगे। लेकिन अगर आप सचमुच देश में रोजगार बढ़ाना चाहते हैं, तो आपको बस एक बात लिखित में देनी होगी: कि इन युवाओं का भविष्य खतरे में नहीं पड़ना चाहिए और उनकी मांगें पूरी होनी चाहिए। कृपया आपने जो पहले वादा किया था, उसे लिखित में पूरा करें।"
मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात की मांग
राजपूत ने कहा कि अभ्यर्थी अपना आंदोलन जारी रखेंगे और मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात की मांग करेंगे। उन्होंने कहा कि उम्मीदवारों को अपनी चुनी हुई सरकार के सामने अपनी समस्याएं रखने का अधिकार है। उन्होंने कहा, "हम जब तक कर सकते हैं, विरोध प्रदर्शन करते रहेंगे। हम मुख्यमंत्री से मिलेंगे; यह हमारा अधिकार है। हमने ही उन्हें चुना है। हमारा सिर्फ एक ही रुख है: हम इस देश के लोग हैं और हम यहां मौजूद हैं।" प्रदर्शनकारियों से स्वेच्छा से आत्मसमर्पण करने की अपील पर नाराजगी जताते हुए राजपूत ने कहा कि अभ्यर्थी शिक्षित हैं और अपने अधिकारों को समझते हैं। उन्होंने दावा किया कि कुछ उम्मीदवार अपनी मांगों की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए भूख हड़ताल कर रहे हैं। इनमें बिना पानी के उपवास करने वाले अभ्यर्थी भी शामिल हैं। उन्होंने कहा, "हम इतने निचले स्तर पर उतर आए हैं कि हम अपने शरीर को नुकसान पहुंचा रहे हैं। और आप कह रहे हैं कि हम आज सड़कों पर उतरे हैं। पूरा देश देख रहा है कि हम आज सड़कों पर उतरे हैं, लेकिन आपने ही हमें ऐसा करने के लिए मजबूर किया है।" प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों ने "इंकलाब जिंदाबाद", "शिक्षा मंत्री झूठा है", "शिक्षा मंत्री गायब है" और "राहुल गांधी हमारे साथ हैं" जैसे नारे लगाए। इसके अलावा उन्होंने "एक कचौरी दो समोसा, शिक्षा मंत्री का क्या भरोसा?" के नारे लगाकर भी अपना विरोध जताया।
राहुल गांधी ने भी मुख्यमंत्री को लिखा था पत्र
यह आंदोलन मध्य प्रदेश में शिक्षक भर्ती के तहत भरे जाने वाले पदों की संख्या को लेकर जारी विवाद के बीच हुआ है। इससे पहले, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 29 सितंबर को मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों की मांगों पर ध्यान देने और द्वितीय व तृतीय श्रेणी के पदों की संख्या बढ़ाने का आग्रह किया था। अपने पत्र में राहुल गांधी ने कहा था कि मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में एक लाख से अधिक शिक्षक पद रिक्त हैं, जिससे बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है। उन्होंने बताया कि शिक्षक भर्ती 2025 के तहत 13,089 तृतीय श्रेणी और 10,800 द्वितीय श्रेणी के पद घोषित किए गए हैं।
सीमित रिक्तियों से उम्मीदवार परेशान
राहुल गांधी ने कहा था कि परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करने वाले अभ्यर्थी, जिनमें अतिथि शिक्षक के रूप में काम कर रहे उम्मीदवार भी शामिल हैं, सीमित रिक्तियों के कारण स्थायी रोजगार की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने भर्ती के अवसरों का इंतजार करते हुए आयु सीमा पार कर चुके उम्मीदवारों की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने मुख्यमंत्री से प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों को जारी किए गए नोटिस वापस लेने, उनके प्रतिनिधियों से मुलाकात करने और उनकी शिकायतें सुनने का आग्रह किया था। साथ ही, उन्होंने द्वितीय और तृतीय श्रेणी के शिक्षक पदों के लिए तत्काल पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करने और काउंसलिंग का दूसरा दौर आयोजित करने की मांग की थी। राहुल गांधी को सौंपे गए अभ्यर्थियों के ज्ञापन के अनुसार, राज्य के शिक्षा विभाग में 1.15 लाख से अधिक स्वीकृत शिक्षण पद हैं, जबकि लगभग 15,000 पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। अभ्यर्थियों ने कक्षा-2 की भर्ती में प्रत्येक विषय के लिए 3,000 पद बढ़ाने और कक्षा-3 की भर्ती के तहत कुल 25,000 पद सृजित करने की मांग की है। उन्होंने राहुल गांधी से भोपाल आकर संबंधित अधिकारियों के सामने उनकी मांगें रखने का भी अनुरोध किया है। अभ्यर्थियों का दावा है कि वे 17 नवंबर, 2025 से भोपाल में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। उनके मुताबिक, 21 अगस्त, 2026 को शुरू हुआ अनिश्चितकालीन विरोध प्रदर्शन अब भी जारी है। उनकी मुख्य मांग सरकारी स्कूलों में रिक्त पदों की संख्या बढ़ाने और शिक्षक भर्ती में अधिक अवसर उपलब्ध कराने की है।
(एएनआई)
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