भिंड में जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंच रहे शिक्षक, उफनती नदी को रबर ट्यूब से पार करने की मजबूरी
भिंड (मध्य प्रदेश)। देश अपनी आजादी का अमृत महोत्सव मना चुका है, लेकिन मध्य प्रदेश के भिंड जिले से आई एक तस्वीर प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत के अंतर को उजागर करती है। ग्राम पंचायत बबेड़ी के अंतर्गत आने वाले शासकीय स्कूलों के शिक्षकों और बच्चों को रोजाना उफनती बैसली नदी को हवा भरे रबर ट्यूब पर बैठकर पार करना पड़ रहा है। वजह है, लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) का अनिवार्य 'ई-अटेंडेंस' नियम और क्षेत्र में पुल या पक्की सड़क का न होना।
हर साल बरसात मे होती है यह समस्या
भिंड जिले के बबेड़ी ग्राम पंचायत क्षेत्र में बारिश के दिनों में बैसली नदी और उससे जुड़ा बरसाती नाला (खार) उफान पर आ जाता है। जलस्तर बढ़ते ही नदरौली और सुमेर सिंह का पुरा गांव का संपर्क मुख्य मार्ग से पूरी तरह कट जाता है। यह समस्या साल के पूरे चार महीने (बरसात के मौसम में) बनी रहती है।
अपनीजान जोखिम में डालते है शिक्षक
दूसरी ओर, शिक्षा विभाग द्वारा लागू की गई ऑनलाइन ई-अटेंडेंस प्रणाली के तहत शिक्षकों को हर हाल में समय पर स्कूल पहुंचकर पोर्टल पर उपस्थिति दर्ज करानी होती है। देरी होने या हाजिरी न लगने पर वेतन कटौती और विभागीय कार्रवाई का डर रहता है। इस प्रशासनिक दबाव के चलते शिक्षक अपनी जान हथेली पर रखकर ट्यूब के सहारे उफनते नाले को पार कर रहे हैं। इस क्षेत्र में स्थित तीन प्रमुख विद्यालय और वहां तैनात शिक्षक इस समस्या से सीधे तौर पर प्रभावित हैं।
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