टीईटी विवाद पर सड़कों पर उतरे शिक्षक, 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को संरक्षण देने की मांग
झालावाड़ (राजस्थान): शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) विवाद को लेकर झालावाड़ में शिक्षक संगठनों ने गढ़ परिसर से मिनी सचिवालय तक रैली निकालकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद शिक्षकों ने प्रधानमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों के अधिकार सुरक्षित रखने की मांग
शिक्षक संगठनों ने 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों की सेवा, वरिष्ठता, पदोन्नति और अन्य सभी वैधानिक अधिकारों को सुरक्षित रखने की मांग की है। उनका कहना है कि इन शिक्षकों की नियुक्तियां उस समय लागू नियमों और पात्रता मानकों के तहत की गई थीं।
एनसीटीई ने 2010 में लागू की थी टीईटी
ज्ञापन में बताया गया कि 23 अगस्त 2010 को National Council for Teacher Education (एनसीटीई) ने शिक्षक भर्ती के लिए टीईटी को न्यूनतम योग्यता के रूप में लागू किया था। इससे पहले विभिन्न राज्यों में प्रचलित नियमों के आधार पर लाखों शिक्षकों की नियुक्तियां की जा चुकी थीं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बढ़ी चिंता
शिक्षक संगठनों का कहना है कि 29 मई 2026 को आए सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद वर्ष 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों के बीच अपने भविष्य को लेकर चिंता और असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।
प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का दिया हवाला
शिक्षकों का तर्क है कि बाद में लागू किए गए पात्रता मानकों को पूर्व प्रभाव से लागू करना प्राकृतिक न्याय, समानता और विधिक निश्चितता के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। उनका कहना है कि वर्षों पहले नियुक्त शिक्षकों पर नए नियम लागू करना उचित नहीं होगा।
विशेष विधायी संशोधन की मांग
शिक्षक नेताओं ने केंद्र सरकार से मांग की है कि 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से स्थायी छूट दी जाए। साथ ही यदि आवश्यक हो तो संसद में विशेष विधायी संशोधन कर उन्हें राहत प्रदान की जाए।
असमंजस दूर करने की अपील
ज्ञापन में केंद्र सरकार से सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की गई है, ताकि शिक्षकों के बीच व्याप्त असुरक्षा और भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके।
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