विधानसभा चुनाव के नतीजों का ऐलान होने के बाद से 10 दिन में TMC के 10 कार्यकर्ताओं की गई जान
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के नतीजों का ऐलान होने के बाद केवल दस दिन में टीएमसी के दस कार्यकर्ताओं की जान ले ली गई और तीन हजार से अधिक कार्यकर्ताओं पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया गया। टीएमसी सुप्रीमो व पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्देश पर गठित तीन फाइडिंग कमेटियों ने हुगली, पूर्व मेदिनीपुर और दक्षिण चौबीस परगना जिले के विभिन्न इलाकों का दौरा करने के बाद ये तथ्य प्राप्त किए।
टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने कालीघाट स्थित अपने आवास में पार्टी की लीगल सेल की बैठक की और अधिवक्ताओं को कहा कि वे पार्टी की फाइडिंग कमिटियों की रिपोर्ट के मद्देनजर पार्टी के कार्यकर्याओं के साथ हुई हिंसा की घटनाओं के खिलाफ हाईकोर्ट में जोरदार तरीके से मामला उठाने की तैयारी करें।
भाजपा के लोगों के हमले के वक्त केंद्रीय बल था मौजूद
ममता बनर्जी ने यह भी जिक्र किया कि वे हिंसा की घटनाओं को लेकर किए गए मामले में पैरवी के लिए खुद कलकत्ता हाई कोर्ट में मौजूद हुई थीं। वहां भी कोर्ट के परिसर में भाजपा ने उन पर हमला करवाया। टीएमसी की एक फाइडिंग कमिटी के सदस्य सांसद सामिरुल इसलाम, प्रतिमा मंडल, पूर्व मंत्री वीरवाहा हांसदा हुगली जिले के गोघाटा के नकूंडा गांव में गए, जहां स्थानीय टीएमसी के नेता सहदेव बाग की हत्या कर दी गई थी। कमिटी जिले के आरामबाग समेत दूसरे इलाकों में गई और टीएमसी कार्यकर्ताओं के साथ हुई हिंसा की घटनाओं की जानकारी ली।
टीएमसी सांसद दोला सेन और शर्मिला सरकार की दूसरी फाइडिंग कमिटी पूर्व मेदिनीपुर के मयना, तमलूक यौर हल्दिया गई। सांसद सजदा अहमद, प्रसून बंद्योपाध्याय और सुस्मिता देब की फाइडिंग कमिटी ने दक्षिण चौबीस परगना के कूलपी, मंदिरबाजार, मथुरापुर इलाके का दौरा किया। तीनों फाइडिंग कमेटी का कहना है कि भाजपा के लोगों के हमले के वक्त केंद्रीय बल मौजूद था, लेकिन उसने टीएमसी के कार्यकर्ताओं के बचाव के कुछथ नहीं किया। चुनाव के नतीजा के बाद सुनियोजित ढंग से टीएमसी के कार्यकर्ताओं पर हमले हुए। पार्टी के कार्यालयों को तोड़ा गया और उसमें आग लगाई गई। तमाम पार्टी कार्यालयों पर कब्जा किया गया।
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