बोरतलाव पंचायत में सरपंच पर धमकी-मारपीट के आरोप, अविश्वास प्रस्ताव से पहले गांव में बवाल
राजनांदगांव (छत्तीसगढ़)। राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ ब्लॉक की ग्राम पंचायत बोरतलाव में सरपंच कैलाश उइके के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव से पहले विवाद गहराता जा रहा है। सरपंच के खिलाफ पंचायत के 20 में से 18 पंचों ने अविश्वास प्रस्ताव के समर्थन में सहमति दी है। इसी बीच पंचों ने सरपंच पर दबाव बनाने, धमकाने और मारपीट करवाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले की शिकायत बोरतलाव थाना में की गई है और अब पूरा मामला राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा का विषय बन गया है।
डराने-धमकाने और दबाव बनाने का आरोप
जानकारी के मुताबिक, ग्राम पंचायत बोरतलाव के 18 पंचों ने 3 जून को डोंगरगढ़ एसडीएम कार्यालय पहुंचकर सरपंच कैलाश उइके के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का ज्ञापन सौंपा था। इसके बाद पंचायत की राजनीति में हलचल तेज हो गई। आगामी दिनों में अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान होना है, लेकिन उससे पहले ही पंचों ने आरोप लगाया है कि प्रस्ताव का समर्थन करने वालों पर दबाव बनाया जा रहा है और उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश की जा रही है।
पंच का आरोप- गाड़ी से उतरते ही की गई मारपीट
ग्राम पंचायत के पंच ग्रामीणों के साथ बोरतलाव थाना पहुंचे और शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि सरपंच के समर्थन में जुटी महिलाओं की भीड़ द्वारा उनके साथ मारपीट की गई। भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के अध्यक्ष एवं वार्ड पंच देवेंद्र सुलाखे का कहना है कि वार्ड क्रमांक-1 की पंच मधु साहू के घर महिलाओं के जुटने की सूचना मिलने पर वे अन्य पंचों के साथ वहां पहुंचे थे। आरोप है कि गाड़ी से उतरते ही उनके साथ मारपीट की गई और अविश्वास प्रस्ताव वापस लेने का दबाव बनाया गया।
'आत्महत्या की धमकी देकर कराया दस्तखत'
वहीं वार्ड पंच उर्वशी नेताम ने भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि सरपंच द्वारा उन्हें अपने पास बुलाकर समर्थन पत्र पर हस्ताक्षर करने का दबाव बनाया गया। उर्वशी का आरोप है कि आत्महत्या की धमकी देकर उनसे जबरन हस्ताक्षर करवाए गए। पंचों का कहना है कि लगातार दबाव और घटनाओं के चलते गांव में भय का माहौल है। पंचों और ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि मामले में जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में उग्र प्रदर्शन किया जाएगा।
पहले भी विवादों में रहे हैं सरपंच
बताया जा रहा है कि यह पहला मौका नहीं है जब सरपंच कैलाश उइके विवादों में घिरे हों। इससे पहले मनरेगा कार्यों में कथित अनियमितताओं की रिपोर्टिंग करने पहुंचे पत्रकारों के साथ भी दुर्व्यवहार और दबाव बनाने के आरोप लग चुके हैं। अब अविश्वास प्रस्ताव से पहले सामने आए नए आरोपों ने मामले को और गंभीर बना दिया है। गांव में थाना मौजूद होने के बावजूद यदि पंच और जनप्रतिनिधि खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, तो कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। अब सभी की निगाहें अविश्वास प्रस्ताव की वोटिंग पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि सरपंच कैलाश उइके अपनी कुर्सी बचा पाते हैं या नहीं।
मामले की जांच में जुटी पुलिस
फिलहाल पुलिस ने शिकायत प्राप्त कर मामले की जांच शुरू कर दी है। अब जांच की रिपोर्ट और अविश्वास प्रस्ताव के मतदान के बाद ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर साफ हो सकेगी।
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