टीजीटी-पीजीटी भर्ती नियमावली में विसंगतियां: अखिलेश यादव को सौंपा गया ज्ञापन
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। लखनऊ में टीजीटी-पीजीटी अभ्यर्थियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात कर भर्ती नियमावली की विसंगतियों को दूर करने और वंचित अभ्यर्थियों को न्याय दिलाने की मांग को लेकर एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है। इस नए घटनाक्रम ने प्रदेश के लाखों योग्य युवाओं के भविष्य और शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को एक बार फिर से राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
टीजीटी-पीजीटी नियमावली में विसंगतियों का आरोप
समाजवादी पार्टी के मुख्यालय में दिए गए ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि टीजीटी-पीजीटी भर्ती की नई नियमावली में शैक्षणिक योग्यता, विषयगत अर्हता, आरक्षण, टीईटी, बीएड, नॉन-बीएड और कला विषयों से संबंधित गंभीर विसंगतियां मौजूद हैं। इसके कारण करीब 6 से 7 लाख योग्य अभ्यर्थी आवेदन और पूरी भर्ती प्रक्रिया से सीधे तौर पर बाहर हो रहे हैं। अभ्यर्थियों ने इसे उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करार दिया है।
एकल विषय और विशेष अवसरों की मांग
प्रतिनिधिमंडल ने मांग की है कि राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय एवं अन्य विश्वविद्यालयों द्वारा जारी स्नातक के समतुल्य एकल विषय प्रमाणपत्र कार्यक्रम को आधिकारिक मान्यता दी जाए, ताकि संबंधित अभ्यर्थियों को आवेदन का उचित अवसर मिल सके। इसके अलावा, पुरानी नियमावली के आधार पर पात्र रहे और नई नियमावली के चलते वंचित हुए अभ्यर्थियों को एक विशेष अवसर प्रदान करने के लिए तुरंत नया शासनादेश जारी किए जाने की मांग उठाई गई है।
आरक्षण और पारदर्शिता की पुरजोर मांग
ज्ञापन के जरिए यह भी मांग की गई है कि ओबीसी, एससी, एसटी, ईडब्ल्यूएस और अनारक्षित वर्ग के पदों का विषयवार एवं श्रेणीवार विवरण सार्वजनिक किया जाए, जिससे आरक्षण व्यवस्था में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। साथ ही, बीएड में प्रवेश और भर्ती की शैक्षणिक अर्हता में एकरूपता सुनिश्चित करते हुए आरक्षित वर्गों को नियमानुसार अंकों की छूट दिए जाने पर जोर दिया गया है। राज्यपाल को पूर्व में दिए गए अभ्यावेदनों पर अब तक हुई कार्रवाई की स्थिति को भी सार्वजनिक करने को कहा गया है।
नॉन-बीएड और कला अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा
प्रतिनिधिमंडल ने पुरजोर तरीके से यह मुद्दा उठाया कि पूर्व नियमों के अंतर्गत पात्र रहे नॉन-बीएड अभ्यर्थियों तथा प्राविधिक कला, बीएफए (BFA) और एमएफए (MFA) धारकों की पात्रता की न्यायसंगत समीक्षा कर उन्हें भर्ती प्रक्रिया में शामिल किया जाए। इसके साथ ही, टीजीटी के कार्यक्षेत्र को कक्षा 6 से 10 तक करने के प्रभावों और जूनियर भर्ती व्यवस्था की उच्चस्तरीय समीक्षा कर एक नियमित और पारदर्शी भर्ती प्रणाली सुनिश्चित करने की अपील की गई है।
अन्य प्रमुख मांगें और विधानसभा सत्र में उठाने का आग्रह
अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों में यह भी कहा कि टीजीटी भर्ती में इस बार टीईटी (TET) की अनिवार्यता को समाप्त किया जाए। साथ ही, एक्स-आर्मी, दिव्यांग और स्वतंत्रता सेनानी श्रेणी के क्षैतिज आरक्षण को पुरानी नियमावली के प्रावधानों के अनुरूप ही लागू किया जाए। अंत में, अखिलेश यादव से निवेदन किया गया है कि वे इन ज्वलंत मुद्दों को विधानसभा और शासन स्तर पर जोर-शोर से उठाएं, नियमावली की निष्पक्ष जांच कराएं और आवश्यक संशोधन करवाकर वंचित अभ्यर्थियों को न्याय दिलाने की दिशा में सार्थक पहल करें।
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