देश में IAS-IPS अफसरों की भारी कमी, मध्य प्रदेश दूसरे स्थान पर
नई दिल्ली। हाल ही में संसद में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, भारत की प्रशासनिक और कानून व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले IAS और IPS अधिकारियों के पदों में भारी रिक्तियां सामने आई हैं। अखिल भारतीय स्तर पर IAS के देश भर में कुल 6,877 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से वर्तमान में केवल 5,577 अधिकारी ही कार्यरत हैं। यानी 1,300 पद खाली हैं। इसी तरह IPS के कुल 5,099 स्वीकृत पदों में से 4,594 अधिकारी तैनात हैं, जबकि 505 पद रिक्त हैं और IFS का सबसे बुरा हाल है, जहाँ 3,193 पदों में से 1,029 पद खाली हैं।
मध्य प्रदेश में भी चुनौतीपूर्ण स्थिति
मध्य प्रदेश में अधिकारियों की कमी शासन और कानून-व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। ओडिशा के बाद मध्य प्रदेश देश का ऐसा दूसरा राज्य है जहाँ सबसे ज्यादा IPS अधिकारियों की कमी है। वर्तमान में यहाँ 48 IPS पद खाली हैं। मध्य प्रदेश में IAS के 68 पद खाली हैं।
प्रशासन पर क्या पड़ता है प्रभाव?
अधिकारियों की कमी के कारण एक ही अफसर को कई विभागों का अतिरिक्त प्रभार (Charge) संभालना पड़ रहा है, जिससे काम की गति और गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
सन् 2012 से औसत हर साल 180 आईएएस की होती है भर्ती
केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि रिक्त पदों को भरना एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। वर्ष 2012 से हर साल औसतन 180 IAS अधिकारियों की भर्ती की जा रही है। सरकार के अनुसार, आरक्षित श्रेणियों (SC, ST, OBC) के पदों का कोई पुराना बैकलॉग लंबित नहीं है।
2020 से 2024 के बीच बड़ी संख्या में OBC, SC और ST उम्मीदवारों की सीधी भर्ती की गई है। इसके अलावा, दिव्यांगों के लिए 4% आरक्षण का प्रावधान भी लागू है। रिक्तियों का मुख्य कारण अधिकारियों की सेवानिवृत्ति (Retirement), पदोन्नति (Promotion) और प्रतिनियुक्ति (Deputation) है।
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