उज्जैन सिंहस्थ के लिए अब लैंड पुलिंग नहीं होगी, मुख्यमंत्री ने किसानों के साथ की बैठक
Madhya Pradesh : उज्जैन। सिंहस्थ-2025 की तैयारी बीच प्रदेश सरकार लैंड पुलिंग कानून लागू नहीं करेगी। किसान संघ के विरोध के बाद सरकार ने यह योजना पूरी तरह से वापस ले लिया है। अब किसी भी किसान की जमीन का स्थायी अधिग्रहण नहीं होगा। सरकार ने कहा, लैंड पुलिस के अंगर्गत खेत या भूमि का स्थायी कब्जा नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही प्लाट बांटने, भूमि पुनर्व्यवस्था या दीर्घकालिक कब्जे की प्रक्रिया नहीं चलेगी। सरकार ने यह भी कहा है कि प्रस्तावित स्पिरिचुअल सिटी के लिए बड़े पैमाने पर भूमि लेने की योजना भी रोकी गई है।
इस प्रक्रिया के खिलाफ काफी समय से विरोध हो रहा था। मुख्यमंत्री मोहन यादन ने सोमवार रात को भोपाल में किसान संघ, भजपा के पदाधिकारों और उज्जैन प्रशासन के साथ बैठक के बाद यह फैसला लिया। कहा कि सिहस्थ का आयोजन दिव्य, भव्य और विश्वस्तरीय होगा। इसमें साधु- संत और किसानों का पूरा ध्यान रखा जाएगा।बैठक में यह भी तय हुआ कि पुलिस को निरस्त करने के आदेश शीघ्र जारी किये जाएं। इस बैठक में भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, विधायक अनिल जैन, कालूहेड़ा, किसान संघ के महेश चौधरी, कमल सिंह आंजाना मौजूद रहे।
मालूम हो कि 18 नवंबर को भारतीय किसान संघ डेरा डालो घेरा डालो आंदोलन करने लाला था। लैंड पुलिस एक्ट को लेकर किसान संघ के पदाधिकारियों की मुलाकात के बाद पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती भी मुख्यमंत्री निवास पहुंची। उमा भारती और मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव के बीच आघे घंटे तक बातचीत चली। इस बातचीत के बाद कहा गया कि सड़क –सीवरेज जैसे जरूरी काम होते रहेंगे। इसके साथ अब 2378 हेक्टोयर भूमि मेला क्षेत्र में ही अस्थायी निर्माण होंगे।
जमीन सिंहस्थ कानून के तहत लिया जाएगा और..
इसके साथही इस बात भी सहमति बनी कि अब किसान की जमीन लेने पर और वहां यदि फसल लगी हो तो साल भर के किराये का भुगतान किया जाएगा। जमीन सिहस्थ कानून के तहत लिया जाएगा और फिर वापस किया जाएगा। पहले कलेक्टरेट गाइडलाइन पर जमीन मिलती थी अब यह नहीं होगी। इसके साथ ही सिंहस्थ का काम तभी होगा जब किसान पर सहमत होंगे। यह भी तय हुआ कि मेला क्षेत्र में प्रस्तालित 50 किलोमीटर सड़क का बनना प्रस्तावित है।
इस बैठक के बाद आज होने वाले आंदोलन को स्थगित कर दिया गया। अब केवल रैली ही निकाली जाएगी। मालूम हो कि सरकार लैंड पुलिग कानून लाई थी। इसमें तहत किसानों की आधी जमीन स्थायी रूप से चली जाती और मुआवजा भी नहीं मिलता। इस प्रावधान में था कि किसानों की जमीन की 50 फीसदी जमीन सरकार लेती और आधी यानिक कि 50 फीसदी लौटा देती। मालूम हो कि सिहस्थ में 30 करोड़ भक्त के आने का अनुमान है।
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