SIR विवाद पर NDA के तीन सहयोगी दलों ने मांगा चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण
नई दिल्ली: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर दो निर्वाचन आयुक्तों द्वारा जताई गई चिंताओं के संबंध में भारतीय जनता पार्टी के तीन सहयोगी दलों लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), तेलुगु देशम पार्टी और राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने निर्वाचन आयोग से स्थिति स्पष्ट करने की शुक्रवार को मांग की। केंद्रीय मंत्री एवं लोजपा (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने आगाह किया कि चुनाव प्रक्रिया में जनता का भरोसा दांव पर लगा है।
चुनाव आयोग से उठे सवालों पर स्पष्ट जवाब की मांग
उन्होंने कहा कि वह न तो निर्वाचन आयोग का पक्ष ले रहे हैं और न ही विपक्ष के आरोपों का समर्थन कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि जनता के सामने अब जो सवाल उठे हैं, उन पर आयोग की ओर से अधिक स्पष्ट जवाब दिया जाना चाहिए। राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेन्द्र कुशवाहा ने भी आयोग से तत्काल स्पष्टीकरण देने की मांग की, जबकि लोकसभा में तेदेपा के संसदीय दल के नेता लावु श्रीकृष्ण देवरायलू ने कहा कि पारदर्शिता से इस संवैधानिक संस्था में विश्वास मजबूत करने में मदद मिलेगी।
निर्वाचन आयोग के फैसलों पर आयुक्तों की 14 बार आपत्ति का दावा
सहयोगी दलों की यह टिप्पणी अंग्रेजी दैनिक 'द इंडियन एक्सप्रेस' में प्रकाशित एक खबर के बाद आई है। खबर के मुताबिक, निर्वाचन आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में निर्वाचन आयोग के फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार औपचारिक रूप से आपत्ति जताई थी। इन फैसलों और आदेशों में मतदाताओं के नाम जोड़ने, हटाने और बहाल करने के साथ-साथ मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया में बदलाव भी शामिल थे।
पासवान ने आयोग पर उठे सवालों पर स्पष्टता की जरूरत बताई
इस खबर के बाद विपक्ष ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को रोकने की मांग की है। पासवान ने संवाददाताओं से कहा, मैं यह साफ कर दूं कि सरकार का हिस्सा होने के नाते मेरा इरादा किसी संवैधानिक संस्था का बचाव करना नहीं है। मैं विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोपों को लेकर भी ज्यादा चिंतित नहीं हूं, क्योंकि वह हमेशा ऐसा रुख अपनाएगा, जो उसे राजनीतिक रूप से मुफीद लगता हो।
चुनावी व्यवस्था पर भरोसा बनाए रखने के लिए आयोग से स्पष्टीकरण की मांग
उन्होंने कहा, अगर लोग चुनावी व्यवस्था पर भरोसा खोने लगेंगे, तो यह लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं होगा। इसलिए, मुझे लगता है कि निर्वाचन आयोग को अधिक स्पष्टता के साथ अपना पक्ष रखना चाहिए। उसे राहुल गांधी और उनके सहयोगी क्या कह रहे हैं, इसका जवाब देने की जरूरत नहीं है। लेकिन लोगों के मन में पैदा हुई आशंकाओं को दूर करना चाहिए। तेदेपा नेता देवरायलू ने कहा कि हालांकि आंध्र प्रदेश में एसआईआर की प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ की गई थी, फिर भी निर्वाचन आयोग की ओर से स्पष्टीकरण आना बेहतर होगा।
विवाद से जनता में भ्रम की स्थिति पैदा हुई
उन्होंने कहा, आंध्र प्रदेश के संदर्भ में एसआईआर प्रक्रिया को करीब से देखने के बाद मैं कह सकता हूं कि यह प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी की गई थी। हर मतदाता को इसमें भाग लेने और अपनी चिंताएं जताने के लिए पर्याप्त अवसर और समय दिया गया। राज्यसभा सदस्य कुशवाहा ने कहा कि इस विवाद ने लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर निर्वाचन आयोग को टैग करते हुए लिखा, एसआईआर से जुड़े विवाद ने जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है।
अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लेने का दावा
इस मामले का समाधान किया जाना चाहिए। इस भ्रम को दूर करने के लिए निर्वाचन आयोग को वास्तविक स्थिति के संबंध में तुरंत स्पष्टीकरण जारी करना चाहिए। दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग ने बुधवार को कहा था कि उसके सदस्यों के बीच अलग-अलग मत होना विचार-विमर्श का सामान्य हिस्सा है और एसआईआर से संबंधित फैसलों सहित उसके सभी अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए थे। इस बीच सत्तारूढ़ भाजपा ने आयोग के भीतर मतभेदों को ज्यादा तवज्जो न देते हुए कहा कि आधिकारिक विचार-विमर्श के दौरान विचारों का आदान-प्रदान विशुद्ध लोकतंत्र को दर्शाता है।
ये भी पढ़ें- समस्तीपुर पुलिस प्रशासन की कड़ी कार्रवाई, मुख्य आरोपियों के घरों पर चला बुलडोजर