खबरों के मुताबिक, चीनी अधिकारियों ने तिब्बत के पूर

तिब्बत में सदियों पुराने किले को गिराए जाने पर विवाद, सांस्कृतिक विरासत मिटाने के आरोप

Tibet Heritage Site Faces Demolition

धर्मशाला (हिमाचल प्रदेश): खबरों के मुताबिक, चीनी अधिकारियों ने तिब्बत के पूर्वी ग्यालरॉन्ग क्षेत्र में स्थित एक सदियों पुराने किले को ध्वस्त कर दिया है। इस घटना के बाद निर्वासित तिब्बतियों में आक्रोश फैल गया है और तिब्बती सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को लेकर नई चिंताएं सामने आई हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में भारी मशीनरी और बुलडोजर को ऐतिहासिक पत्थर की संरचना को गिराते हुए देखा जा सकता है। माना जा रहा है कि यह किला तिब्बती साम्राज्य के काल का था। रिपोर्ट के अनुसार, यह वीडियो इस सप्ताह की शुरुआत में ऑनलाइन सामने आया। हालांकि, तिब्बत में कड़े सूचना नियंत्रण के कारण यह स्पष्ट नहीं है कि किले को कब ध्वस्त किया गया।

'जातीय एकता कानून' के बाद बढ़ी चर्चाएं

ऑनलाइन रिपोर्टों के अनुसार, यह कार्रवाई चीन द्वारा विवादास्पद "जातीय एकता और प्रगति कानून" लागू किए जाने के तुरंत बाद हुई। ग्यालरॉन्ग क्षेत्र अपने प्राचीन पत्थर के किलों और मीनारों के लिए प्रसिद्ध है, जिन्हें तिब्बती इतिहास और वास्तुकला का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

1,200 साल पुरानी विरासत पर असर

बताया जाता है कि इन किलों और मीनारों का निर्माण छठी से उन्नीसवीं शताब्दी के बीच लगभग 1,300 वर्षों की अवधि में हुआ था। इनमें से कुछ संरचनाएं तिब्बती साम्राज्य के समय की हैं, जबकि कुछ का निर्माण मांचू सैन्य अभियानों के दौरान हुआ था। विशेषज्ञों के अनुसार, इस क्षेत्र की सबसे पुरानी बची हुई मीनारें लगभग 1,200 वर्ष पुरानी मानी जाती हैं।

तिब्बती समुदाय ने जताई नाराजगी

इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर कई तिब्बती लोगों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे तिब्बत की सांस्कृतिक विरासत के लिए अपूरणीय क्षति बताया और आरोप लगाया कि यह तिब्बती ऐतिहासिक पहचान को कमजोर करने और मिटाने की व्यापक कोशिश का हिस्सा है। एक तिब्बती सोशल मीडिया उपयोगकर्ता ने X पर लिखा कि यदि ये रिपोर्ट सही हैं, तो चीनी अधिकारी केवल तिब्बती संस्कृति का आत्मसात करने की कोशिश नहीं कर रहे, बल्कि तिब्बती राष्ट्र से जुड़े ऐतिहासिक स्मारकों को भी नष्ट कर रहे हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि राष्ट्रीय स्तर पर सांस्कृतिक विरासत का दर्जा प्राप्त बताए जाने वाले प्राचीन ग्यालरॉन्ग टावरों को आखिर क्यों ध्वस्त किया जा रहा है।

ANI

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