8 हजार फीट की ऊंचाई पर बिनसर अभ्यारण्य में दिखा बाघ, वन विभाग ने बढ़ाई निगरानी
अल्मोड़ा (उत्तराखंड): अल्मोड़ा में लगभग 8,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित बिनसर वन्यजीव अभ्यारण्य में बंगाल टाइगर देखे जाने की खबर के बाद वन विभाग ने क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है। विभाग ने पर्यटकों और स्थानीय निवासियों के लिए सतर्कता बरतने की सलाह जारी की है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
बिनसर वन्यजीव अभ्यारण्य में एक बाघ के घूमने का कथित वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित हुआ है। वन विभाग ने भी अभ्यारण्य में बाघ की मौजूदगी की पुष्टि की है और उसकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए निगरानी बढ़ा दी है। बाघ देखे जाने के बाद वन अधिकारियों ने अभ्यारण्य में रणनीतिक स्थानों पर कैमरा ट्रैप लगाए हैं। इन कैमरों के जरिए बाघ की तस्वीरें और वीडियो जुटाए जा रहे हैं, ताकि उसकी गतिविधियों के पैटर्न और स्थान का पता लगाया जा सके।
क्यूआरटी टीम भी सक्रिय
बाघ की गतिविधियों से उत्पन्न किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए एक त्वरित प्रतिक्रिया दल (क्यूआरटी) भी सक्रिय किया गया है। एएनआई से विशेष रूप से बात करते हुए सिविल सोयम वन प्रभाग के डीएफओ प्रदीप धौलखंडी ने कहा कि विभाग बाघ की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहा है और उसकी गतिविधियों से संबंधित डेटा जुटा रहा है। उन्होंने बताया कि बाघों का इलाका आमतौर पर काफी बड़ा होता है और वे भोजन की तलाश तथा अपने क्षेत्र में घूमते हुए लंबी दूरी तय कर सकते हैं। उनके अनुसार, एक बाघ सामान्यतः लगभग 1,000 से 1,500 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में घूम सकता है और बिनसर में उसकी मौजूदगी उसकी सामान्य क्षेत्रीय गतिविधि का हिस्सा हो सकती है।
अभ्यारण्य में गश्त बढ़ाई गई
बाघ की मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद वन विभाग ने अभ्यारण्य के अंदर और आसपास गश्त तेज कर दी है। अधिकारियों ने बताया कि टीमें नियमित रूप से कैमरा फुटेज की निगरानी कर रही हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि बाघ अभी भी क्षेत्र में मौजूद है या किसी दूसरे इलाके में चला गया है। वन विभाग की टीमें बाघ की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और उसके संभावित मूवमेंट वाले क्षेत्रों की निगरानी की जा रही है।
पर्यटकों और ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह
स्थानीय ग्रामीणों और पर्यटकों को उन क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है, जहां बाघ की आवाजाही की सूचना मिली है। अधिकारियों ने लोगों को खास तौर पर सुबह तड़के और अंधेरे के दौरान अकेले सुनसान इलाकों में जाने से बचने की सलाह दी है। पर्यटकों को समूह में यात्रा करने के लिए कहा गया है। विभाग के अनुसार, अभ्यारण्य के अंदर और आसपास रहने वाले ग्रामीण वन्यजीवों के साथ रहने के आदी हैं, लेकिन पर्यटकों और बाहरी आगंतुकों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है क्योंकि वे क्षेत्र के भूभाग और वन्यजीवों की आवाजाही से पूरी तरह परिचित नहीं होते।
फोटो और वीडियो जुटाए जा रहे
वन अधिकारी बाघ की मौजूदगी की आगे पुष्टि के लिए फोटो और वीडियो साक्ष्य भी एकत्र कर रहे हैं। कैमरा ट्रैप के जरिए जुटाए गए डेटा को वैज्ञानिक सत्यापन और आगे के मूल्यांकन के लिए कॉर्बेट टाइगर रिजर्व या देहरादून के संबंधित विशेष संस्थानों को भेजा जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो के अलावा जानवर की गतिविधियों और उसके स्थान का पता लगाने के लिए अन्य सबूत भी जुटाए जा रहे हैं।
वन विभाग ने कहा- चिंता की बात नहीं
वन विभाग का कहना है कि फिलहाल चिंता की कोई बात नहीं है, क्योंकि बिनसर एक संरक्षित वन्यजीव क्षेत्र है और जंगली जानवरों की मौजूदगी इसके प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा है। हालांकि, बिनसर पर्यटन क्षेत्रों और आबादी वाले इलाकों के आसपास स्थित है, इसलिए बाघ के दिखाई देने के बाद सुरक्षा और निगरानी बढ़ा दी गई है।
लगातार हो रही निगरानी
वन विभाग बाघ की गतिविधियों का पता लगाने और क्षेत्र में आने-जाने वाले वन्यजीवों तथा लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियमित गश्त कर रहा है। साथ ही, कैमरा ट्रैप से प्राप्त फुटेज की लगातार निगरानी की जा रही है। विभाग ने पर्यटकों और स्थानीय निवासियों से वन अधिकारियों द्वारा जारी सलाह का पालन करने, अकेले घूमने से बचने और बाघ को देखने या उसकी मौजूदगी के नए संकेत मिलने पर तुरंत वन विभाग को सूचना देने की अपील की है। इस ताजा घटना ने कुमाऊं के ऊंचे पहाड़ी वन क्षेत्रों में बड़े मांसाहारी जानवरों की मौजूदगी और उनकी गतिविधियों को लेकर लोगों की दिलचस्पी फिर बढ़ा दी है। फिलहाल वन अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और आगे कोई निष्कर्ष निकालने से पहले बाघ की गतिविधियों से जुड़े साक्ष्यों का अध्ययन कर रहे हैं।
(एएनआई)
यह भी पढ़े: संदिग्ध परिस्थितियों में युवक ने फांसी लगाकर दी जान, सट्टे के कर्ज की चर्चा