जिले की सरदारपुर तहसील के ग्राम सगवाल में होली के

सरदारपुर में पारंपरिक 'गल चूल' मेले का भव्य आयोजन: आस्था और साहस के साथ झूले हवा में श्रद्धालु

Tradition and Faith Converge: Grand 'Gal Chool' Fair Held in Sardarpur

धार। जिले की सरदारपुर तहसील के ग्राम सगवाल में होली के अवसर पर परंपरागत ‘गल चूल’ मेले का भव्य आयोजन किया गया। यह मेला केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि अटूट आस्था, अद्भुत साहस और लोकविश्वास का जीवंत प्रतीक माना जाता है। मेले में ग्रामीण अंचलों के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों से भी हजारों श्रद्धालु मनौती मांगने पहुंचे।

प्रमुख रस्म है गल घूमाने की रश्म

मेले की सबसे प्रमुख रस्म 41 फीट ऊंचे खंभे पर ‘गल’ घूमाने की रही। श्रद्धालु विशेष अनुष्ठान के बाद ऊंचे खंभे पर बंधे झूलेनुमा ढांचे पर सवार होकर हवा में चक्कर लगाते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और परिवार पर देवी-देवताओं की कृपा बनी रहती है। पूरे आयोजन के दौरान ढोल-नगाड़ों और जयकारों से वातावरण गूंजता रहा।

महिलाएं भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती हैं

मेले में महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कई महिलाओं ने अंगारों पर चलकर अपनी आस्था प्रकट की। इसे साहस और विश्वास का प्रतीक माना जाता है। आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और हर साल बड़ी संख्या में लोग इसमें भाग लेते हैं।

सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम

सुरक्षा की दृष्टि से प्रशासन और पुलिस बल तैनात रहा। चिकित्सा दल और आपात व्यवस्था भी मौके पर मौजूद रही, ताकि किसी अप्रिय घटना से तुरंत निपटा जा सके। पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं में उत्साह और श्रद्धा का माहौल बना रहा।

सास्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा

ग्रामीणों का कहना है कि ‘गल चूल’ मेला उनकी सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही परंपराओं को जीवित रखे हुए है।

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