रिश्तों को शर्मसार करने वाली दर्दनाक कहानी: बुजुर्ग कारोबारी को अपनों ने नहीं दी अंतिम विदाई
इटावा (उत्तर प्रदेश)। रिश्तों को शर्मसार करने वाला एक दर्दनाक मामला इटावा से सामने आया है। कभी कारोबार की दुनिया में पहचान रखने वाले बुजुर्ग राजकुमार सक्सेना की सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी में उपचार के दौरान मौत हो गई। मौत के बाद भी उनके अपनों का दिल नहीं पसीजा। अंतिम संस्कार के समय न तो उनके तीन बेटे पहुंचे और न ही बेटी और पत्नी ने अंतिम विदाई दी।
परिजनों ने अंतिम संस्कार में शामिल होने से दूरी बना ली
बताया गया कि राजकुमार सक्सेना का शव अस्पताल में रखा रहा। परिवार के सदस्यों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन परिजनों ने अंतिम संस्कार में शामिल होने से दूरी बना ली। बड़े बेटे ने कथित तौर पर यहां तक कह दिया कि उसका पिता से कोई रिश्ता नहीं है और शव जलाया जाए, बहाया जाए या दफनाया जाए, इससे उसे कोई मतलब नहीं है।
रक्तदाता समूह ने पूरे सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी
ऐसे कठिन समय में जब अपने भी साथ छोड़ गए, रक्तदाता समूह के प्रमुख शरद तिवारी और उनकी टीम ने मानवता की मिसाल पेश की। टीम के सदस्यों ने आगे बढ़कर बुजुर्ग के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी उठाई और पूरे सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी।
रिश्तों और मानवीय संवेदनाओं को लेकर कई सवाल
घटना ने समाज में रिश्तों और मानवीय संवेदनाओं को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस उम्र में बुजुर्गों को अपनों के सहारे और सम्मान की जरूरत होती है, उस समय परिवार का इस तरह किनारा कर लेना बेहद पीड़ादायक बताया जा रहा है। मामले की चर्चा क्षेत्र में लोगों के बीच भी बनी हुई है।
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