रीवा में एसी कोच के अटेंडरों की सैलरी से गायब होने

एसी कोच से कंबल और चादर चुरा रहे यात्री, सामान गायब होने पर अटेंडरों की सैलरी कटी

Image from Rewa railway station

रीवा (मध्य प्रदेश)।  AC कोच में यात्रियों की सुविधा के लिए उपलब्ध कराए जाने वाले कंबल, चादर, तकिया और टॉवल के गायब होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। अटेंडरों का आरोप है कि कई यात्री सफर खत्म होने के बाद भी सामान वापस नहीं करते और उसे अपने साथ ले जाते हैं। इसका सीधा असर अटेंडरों की सैलरी पर पड़ रहा है।

 महीने में 4 से 5 हजार रुपये तक की कटौती

अटेंडरों के मुताबिक उनकी मासिक सैलरी करीब 15 से 20 हजार रुपये के बीच है, लेकिन सामान की कमी का हिसाब उनकी तनख्वाह से कर दिया जाता है। कई बार महीने में 4 से 5 हजार रुपये तक की कटौती होने का दावा किया गया है। सबसे ज्यादा समस्या AC-3 कोच में बताई जा रही है, जबकि AC-1 और AC-2 में ऐसे मामले अपेक्षाकृत कम होने की बात कही जा रही है।

 हर यात्री पर नजर रखना संभव नहीं

अटेंडरों का कहना है कि एक ट्रेन में प्रतिदिन कई यात्री टॉवल, चादर या अन्य सामान वापस किए बिना चले जाते हैं। टॉवल के लिए करीब 70 रुपये, चादर के 350 रुपये और कंबल के करीब 950 रुपये तक की कटौती होने की बात सामने आई है। उनका कहना है कि हर यात्री पर नजर रखना संभव नहीं है और आपत्ति करने पर कई बार यात्रियों द्वारा दुर्व्यवहार की शिकायत भी कर दी जाती है।

रेलवे से स्पष्ट व्यवस्था और जांच की मांग

अटेंडरों के अनुसार इन सुविधाओं का संचालन निजी कंपनी के कर्मचारियों द्वारा किया जाता है। पैकेट पर सामान उपलब्ध कराने और यात्रा समाप्त होने से पहले वापस लेने संबंधी निर्देश भी दर्ज रहते हैं, बावजूद इसके सामान गायब होने के मामले सामने आ रहे हैं। अब सवाल है कि यात्रियों द्वारा रेलवे की संपत्ति ले जाने पर क्या कार्रवाई होती है और अटेंडरों की सैलरी से होने वाली कटौती की व्यवस्था कितनी उचित है। मामले में रेलवे से स्पष्ट व्यवस्था और जांच की मांग की जा रही है। 

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