उत्तर प्रदेश में मतदाता सूचियों के विशेष संक्षिप्त

यूपी में वोटर लिस्ट संशोधन से जुड़े अधिकारियों के ट्रांसफर पर रोक, ECI की मंजूरी जरूरी

Transfer Ban on UP Voter List Officials

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मतदाता सूचियों के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR)-2027 की प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों का चुनाव आयोग की पूर्व अनुमति के बिना ट्रांसफर नहीं किया जा सकेगा। भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने निर्देश दिया है कि मतदाता सूची के ड्राफ्ट प्रकाशन से लेकर अंतिम प्रकाशन तक पुनरीक्षण कार्य से जुड़े अधिकारियों के तबादले के लिए आयोग की मंजूरी जरूरी होगी। उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 13CC के तहत मतदाता सूची तैयार करने, उसमें संशोधन करने और पुनरीक्षण से जुड़े अधिकारी चुनाव आयोग के प्रतिनियुक्ति पर माने जाते हैं। इस दौरान वे आयोग के नियंत्रण, पर्यवेक्षण और अनुशासन के अधीन काम करते हैं। आयोग ने निर्देश दिया है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया से जुड़े जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO), निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO), सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (AERO) और अन्य संबंधित अधिकारियों के पद खाली नहीं रखे जाएंगे। इनके ट्रांसफर के लिए आयोग की पहले से अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

12 नवंबर को जारी होगी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट

चुनाव आयोग की ओर से निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, उत्तर प्रदेश में एकीकृत मतदाता सूची का ड्राफ्ट 12 नवंबर, 2026 को प्रकाशित किया जाएगा। इसके बाद 12 नवंबर से 11 दिसंबर तक मतदाता सूची में नाम शामिल कराने, हटाने या अन्य संशोधनों से संबंधित दावे और आपत्तियां दर्ज कराई जा सकेंगी। दावों और आपत्तियों का निपटारा 28 दिसंबर, 2026 तक किया जाएगा। इसके बाद अंतिम मतदाता सूची 4 जनवरी, 2027 को प्रकाशित की जाएगी। इस प्रक्रिया में 1 जनवरी, 2027 को अर्हक तिथि माना गया है।

17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में होगा पुनरीक्षण

इससे पहले बुधवार को चुनाव आयोग ने 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण के निर्देश जारी किए थे। यह प्रक्रिया जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21 के तहत शुरू की जा रही है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और पात्र नागरिकों का नाम इसमें शामिल करना है। इस चरण में उत्तर प्रदेश के अलावा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, मणिपुर, पुडुचेरी, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल शामिल हैं।

कुछ राज्यों के लिए अलग से घोषित होगा कार्यक्रम

आयोग के पत्र के अनुसार, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक, महाराष्ट्र, ओडिशा, तेलंगाना और दिल्ली जैसे राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के लिए कार्यक्रम अलग से घोषित किया जाएगा, जहां विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) जारी है या हाल ही में पूरा हुआ है। वहीं, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए पुनरीक्षण कार्यक्रम बाद में अधिसूचित किया जाएगा। निर्धारित समयसीमा के मुताबिक, 2 नवंबर तक मतदान केंद्रों का युक्तिकरण किया जाना है। इसके बाद 12 नवंबर को ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित होगी और 11 दिसंबर तक दावे व आपत्तियां स्वीकार की जाएंगी। इनका निपटारा 28 दिसंबर तक किया जाएगा। चुनाव आयोग ने जोर दिया है कि संबंधित विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी की जिम्मेदारी होगी कि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची में शामिल होने से न छूटे। साथ ही, किसी भी अपात्र व्यक्ति का नाम सूची में शामिल न हो और न ही बना रहे।

(ANI)

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