त्रिपुरा के असाबाड़ी हमले में 8 और आरोपी गिरफ्तार, कुल गिरफ्तारियों की संख्या 18 पहुंची
अगरतला (त्रिपुरा)। सिपाहीजाला जिले में असाबाड़ी हमला मामले में एक बड़ा विकास सामने आया है, जहां एक अदालत ने गुरुवार को बॉक्सनगर में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के कर्मियों पर कथित हमले और उनका सेवा हथियार छीनने के सिलसिले में आठ और आरोपियों को आठ दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। कलमचौरा पुलिस थाने की पुलिस ने बुधवार रात इन आठों आरोपियों को गिरफ्तार किया और गुरुवार को उन्हें सिपाहीजाला जिला एवं सत्र न्यायालय में पेश किया।
तीन महिलाओं सहित 10 लोग गिरफ्तार
इन ताजा गिरफ्तारियों के साथ इस मामले में गिरफ्तार किए गए लोगों की कुल संख्या 18 हो गई है। इससे पहले 3 नवंबर को पुलिस ने इस घटना के सिलसिले में सात पुरुषों और तीन महिलाओं सहित 10 लोगों को गिरफ्तार किया था। लोक अभियोजक गौतम गिर ने कहा कि अदालत ने पुलिस की रिमांड की अर्जी मंजूर कर ली है और उन्हें विश्वास है कि आगे की जांच से घटनाओं के क्रम को स्थापित करने और इसमें शामिल लोगों को न्याय के कटघरे में लाने में मदद मिलेगी।
अब तक कुल गिरफ्तारियों की संख्या 18
एएनआई से बात करते हुए, त्रिपुरा पुलिस के महानिरीक्षक (कानून और व्यवस्था) इप्पर मनचाक ने कहा कि पुलिस ने 2 नवंबर की घटना का तुरंत संज्ञान लिया था और साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रही है। मनचाक ने एएनआई को बताया कि इस महीने की 2 तारीख को कुछ स्थानीय लोगों ने असाबाड़ी सीमा चौकी (बीओपी) के बीएसएफ कर्मियों के साथ दुर्व्यवहार किया और उन पर हमला किया। घटना का संज्ञान लेते हुए पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की। पहले दिन, तीन महिलाओं और सात पुरुषों सहित 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, और कल 8 और लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिससे अब तक कुल गिरफ्तारियों की संख्या 18 हो गई है। एफआईआर में नामजद लोगों और उनके सहयोगियों सहित हम सभी की जांच कर रहे हैं और साक्ष्यों के आधार पर ही सख्त गिरफ्तारियां कर रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास सक्रिय तस्करी नेटवर्क
वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास सक्रिय कथित तस्करी नेटवर्क की ओर इशारा करते हुए कहा कि सीमा के पास मानव बस्तियों की निकटता का फायदा तस्करों द्वारा छोटे सामानों की आवाजाही के लिए उठाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बीएसएफ कर्मी सीसीटीवी कैमरों और अन्य तकनीकी प्रणालियों की मदद से सीमा पर सतर्क निगरानी बनाए हुए हैं। हमले से पहले की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि बीएसएफ कर्मियों को उनके नियंत्रण केंद्र से सीसीटीवी फुटेज पर संदिग्ध गतिविधि का पता चलने की सूचना मिली थी और उन्होंने तुरंत हस्तक्षेप किया था।
पर्दे के पीछे से हिंसा को दे रहे अंजाम
मनचाक ने पिछले दो-तीन वर्षों में सिपाहीजाला जिले में चलाए गए मादक पदार्थ विरोधी अभियानों और कथित तस्करी नेटवर्क के बीच बढ़ती निराशा को भी जोड़ा। उनके अनुसार, त्रिपुरा पुलिस, बीएसएफ, त्रिपुरा स्टेट राइफल्स (टीएसआर) और सीआरपीएफ के समन्वित अभियानों के परिणामस्वरूप लगभग छह करोड़ गांजा के पौधों को नष्ट कर दिया गया था, जिससे अवैध व्यापार में शामिल लोगों को भारी वित्तीय नुकसान हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया कि यह हमला तस्करी गतिविधियों से जुड़े तत्वों की निराशा का परिणाम हो सकता है और उन्होंने सुझाव दिया कि पर्दे के पीछे से हिंसा को अंजाम देने वाले लोग भी पुलिस की रडार पर हैं।
लोगों की पहचान करने के लिए जांच जारी
आईजी ने आश्वासन दिया कि शामिल सभी लोगों की पहचान करने के लिए जांच जारी रहेगी और उनका समर्थन करने वाले किसी भी अन्य व्यक्ति को भी निश्चित रूप से गिरफ्तार किया जाएगा। इस घटना ने सीमा सुरक्षा और सीमावर्ती क्षेत्रों में तस्करी, नशीली दवाओं से संबंधित गतिविधियों और संगठित आपराधिक नेटवर्क पर अंकुश लगाने के सरकार के निरंतर प्रयासों पर नए सिरे से ध्यान आकर्षित किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मणिक साहा के नेतृत्व में, त्रिपुरा सरकार अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस के दृष्टिकोण पर जोर दे रही है, कानून प्रवर्तन समन्वय को मजबूत कर रही है और यह सुनिश्चित कर रही है कि कर्मियों की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था को खतरे में डालने वाली घटनाओं से कानून के अनुसार सख्ती से निपटा जाए।
(इनपुटः ANI)
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