त्रिपुरा में आत्मसमर्पण कर चुके उग्रवादियों की 72 घंटे की हड़ताल, रेल और सड़क यातायात प्रभावित
अगरतला (त्रिपुरा)। त्रिपुरा में हथियार डाल चुके उग्रवादी संगठनों की ओर से त्रिपक्षीय शांति समझौते को लागू करने सहित 11 सूत्री मांगों को लेकर बुलाई गई 72 घंटे की हड़ताल के दूसरे दिन शनिवार को राज्य के विभिन्न हिस्सों में ट्रेन सेवाएं और वाहनों की आवाजाही प्रभावित रही। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हथियार डाल चुके सैंकडों उग्रवादियों ने ‘ऑल रिटर्नईज रिहैबिलिटेशन कमेटी’ के बैनर तले पश्चिम त्रिपुरा जिले के हतईकोतोर, ब्रिगुदासबारी और खोवाई चौमुहानी में सड़कें अवरुद्ध कर दीं।
कई ट्रेनों के समय में बदलाव की घोषणा
एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, प्रदर्शनकारी पश्चिम त्रिपुरा के ब्रिगुदासबारी में रेल की पटरियों पर बैठ गए जिसके कारण पूर्वोत्तर सीमा रेलवे (एनएफआर) को लंबी दूरी की ट्रेनों सहित कई ट्रेनों को आंशिक रूप से और कुछ को पूरी तरह रद्द करने के साथ-साथ कई ट्रेनों के समय में बदलाव की घोषणा करनी पड़ी। पुलिस अधिकारी ने कहा, “हड़ताल के कारण ट्रेन सेवाओं और वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई है, लेकिन स्थिति शांतिपूर्ण बनी हुई है।”
2024 में हस्ताक्षरित शांति समझौते को लागू करने की मांग
त्रिपुरा की जीवनरेखा माने जाने वाले असम-अगरतला राष्ट्रीय राजमार्ग पर हतईकोतोर में हड़ताल के कारण वाहनों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई। इसके कारण पूर्वोत्तर का यह राज्य देश के बाकी हिस्सों से संपर्क में गंभीर रूप से प्रभावित हुआ। हथियार डाल चुके सात उग्रवादी गुटों का प्रतिनिधित्व करने वाली ‘ऑल रिटर्नईज रिहैबिलिटेशन कमेटी’ ने 2024 में हस्ताक्षरित शांति समझौते को लागू करने की मांग को लेकर शुक्रवार को 72 घंटे की हड़ताल शुरू की थी। इस समझौते के तहत उग्रवादियों ने मुख्यमंत्री माणिक साहा के समक्ष हथियार डाले थे।
11 सूत्री मांगों में मूल निवासियों के लिए भूमि अधिकार सुनिश्चित
पश्चिम त्रिपुरा के जिलाधिकारी विशाल कुमार ने शुक्रवार को बैठक के बाद पत्रकारों से कहा, “हमने शांति समझौते के विभिन्न बिंदुओं पर कमेटी के नेताओं के साथ हतईकोतोर में बातचीत की है। उन्होंने कुछ मांगें रखी हैं, जिन पर सरकार काम करने के लिए तैयार है। सरकार समयबद्ध तरीके से समझौते को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।” उन्होंने कहा कि कमेटी के नेताओं ने बताया है कि वे सरकार के प्रस्तावों पर अपने कैडरों के साथ चर्चा करेंगे और जल्द से जल्द प्रशासन को इसकी जानकारी देंगे। संगठन की 11 सूत्री मांगों में मूल निवासियों के लिए भूमि अधिकार सुनिश्चित करना और हथियार डाल चुके उग्रवादियों के खिलाफ लंबित सभी मामले वापस लेना शामिल हैं। (इनपुट: भाषा)
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