अमृतसर में खालिस्तान-समर्थक नारे लगाने के आरोप में दो लोग गिरफ्तार; पुलिस का दावा - अमेरिका से जुड़ा है मामला
अमृतसर (पंजाब)। डिप्टी कमिश्नर ऑफ़ पुलिस (DCP) जसकरण सिंह तेजा ने शनिवार को बताया कि अमृतसर पुलिस ने 25 और 26 सितंबर की रात दो लोगों को गिरफ्तार किया। इन पर खालिस्तान-समर्थक नारों का समर्थन करने और हॉल रोड व भंडारी ब्रिज पर रेफरेंडम 2020 लिखने के मामले में शामिल होने का आरोप है।
पांच घंटे में आरोपियों की गिरफ्तारी
DCP ने बताया कि पुलिस ने घटना के पांच घंटे के भीतर ही आरोपियों का पता लगाकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार किए गए दोनों लोगों की पहचान अर्शदीप और मनोज के तौर पर हुई है। उन्होंने बताया कि पुलिस ने उनके मोबाइल फ़ोन भी बरामद किए हैं, जिनमें कथित तौर पर घटना से जुड़े सबूत मौजूद थे।
मामले में अमेरिका में रहने वाले दो लोगों के नाम
DCP तेजा ने जानकारी दी कि इस मामले में तीन अन्य लोगों के नाम भी सामने आए हैं, जिनमें अमेरिका में रहने वाले दो लोग शामिल हैं—एक गोरा व्यक्ति है और दूसरा कथित तौर पर गुरपतवंत सिंह पन्नून से जुड़ा है, जो प्रतिबंधित संगठन सिख्स फॉर जस्टिस (SFJ) का प्रमुख है।
पन्नून का नाम भी मामले में शामिल
DCP ने बताया कि पन्नून, जिसे केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 2020 में आतंकवादी घोषित किया था, का नाम भी इस मामले में शामिल है। तेजा ने कहा, "हमने सिर्फ़ 5 घंटे में इस घटना का पता लगाया, दो लोगों को गिरफ्तार किया और उनके मोबाइल फोन जब्त किए, जिनमें सारे सबूत मौजूद थे।"
स्नैपचैट के जरिए पन्नून से संपर्क का दावा
DCP तेजा के अनुसार, अर्शदीप ने स्नैपचैट के जरिए अमेरिका में रहने वाले एक व्यक्ति से संपर्क किया था, जिसने बाद में उसे पन्नून से जुड़वाया। उन्होंने कहा, "अर्शदीप ने स्नैपचैट पर उस गोरे व्यक्ति से बात की। बाद में उसने उसे गुरपतवंत पन्नून से जुड़वा दिया।"
पैसे और विदेश जाने का लालच देने का आरोप
DCP ने बताया कि गिरफ्तार किए गए दोनों व्यक्ति अमृतसर के रहने वाले हैं और लगभग एक ही उम्र के हैं। उन्हें कथित तौर पर पैसे और विदेश जाने के मौके का लालच देकर उकसाया गया था। उन्होंने बताया कि उनमें से एक पन्नून का रिश्तेदार है, जबकि दूसरा उसका दोस्त है।
नारे लिखने के पीछे कानून-व्यवस्था बिगाड़ने का आरोप
तेजा ने कहा, "पन्नून ने इन दोनों लड़कों को पैसे का लालच देकर विदेश जाने के लिए उकसाया।" उन्होंने कहा, "उन बच्चों को न तो कोई पैसे मिले और न ही उन्हें विदेश जाने का मौका मिलेगा। वे इस अपराध में फंस गए हैं और उन्हें सजा भुगतनी होगी।" तेजा ने कहा कि नारे लिखने के पीछे का मकसद कानून-व्यवस्था को बिगाड़ना और देश की एकता और अखंडता को निशाना बनाना था। DCP ने कहा कि इन नारों का मकसद एक संदेश देना था।
नारे लिखकर वीडियो भेजने का आरोप
उन्होंने कहा, "वे अमेरिका के गवर्नर और अमेरिकी राजदूत को यह संदेश देना चाहते थे कि भारत, भारत नहीं बल्कि खालिस्तान है। मकसद भारत की एकता और अखंडता को नुकसान पहुंचाना है।" पुलिस ने वह मोबाइल फोन भी बरामद किया जिसका इस्तेमाल नारे लिखने के बाद उनका वीडियो रिकॉर्ड करने और भेजने के लिए किया गया था। DCP ने बताया कि आरोपियों को नारे लिखने और सबूत के तौर पर वीडियो भेजने के लिए कहा गया था।
मोबाइल में मिले कथित सबूत
उन्होंने कहा, "उन्हें इसे लिखने और वीडियो भेजने के लिए कहा गया था, और फिर वे उनसे संपर्क करके पैसों का मामला सुलझाते।" DCP ने बताया कि बरामद मोबाइल फोन में इस कथित गतिविधि से जुड़े सबूत थे और सोशल मीडिया पर जो वीडियो वायरल हो रहा है, वह वही वीडियो है जिसमें नारे रिकॉर्ड किए गए थे। (Source: ANI)
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