खेलते-खेलते 8 फीट गहरे नाले में समा गईं दो मासूम बहनें, पांच दिन पहले बुआ के घर आई थी अंशिका
बांदा {उत्तर प्रदेश}: सोमवार की सुबह मासूम की हंसी से गूंज रहा घर कुछ ही मिनटों में चीख-पुकार से भर गया। खेलते-खेलते गडरा नाला तक पहुंचीं दो मासूम बहनें पानी में उतरीं, लेकिन फिर कभी बाहर जिंदा नहीं लौट सकीं। 8 फीट गहरे गड्ढे ने दोनों की जिंदगी निगल ली। हादसे के बाद पूरे गांव में मातम छा गया और परिजनों की चीत्कार सुन हर आंख नम हो गई।
खेलते-खेलते पहुंचीं नाले तक
बिसंडा थाना क्षेत्र के ग्राम हस्तम निवासी श्रवण कुमार की 9 वर्षीय बेटी राधिका और उसकी 10 वर्षीय ममेरी बहन अंशिका, जो नरैनी क्षेत्र के ग्राम दिवली की रहने वाली थी, अपनी छोटी बहन लक्ष्मी के साथ खेल रही थीं। इसी दौरान वे अपने बाबा के पीछे-पीछे गडरा नाला पहुंच गईं, जहां भैंसों को नहलाया जा रहा था।
8 फीट गहरे गड्ढे में डूब गईं दोनों
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बाबा एक भैंस को पकड़ने के लिए खेत की ओर चले गए। इसी बीच राधिका और अंशिका नाले में नहाने उतर गईं। पुल निर्माण के दौरान मिट्टी खोदकर बनाए गए करीब आठ फीट गहरे गड्ढे में दोनों फिसल गईं और देखते ही देखते पानी में समा गईं। सबसे छोटी बहन लक्ष्मी ने जब दोनों को डूबते देखा तो उसकी चीख पूरे इलाके में गूंज उठी। ग्रामीण दौड़े, नाले में उतरकर करीब 20 मिनट तक तलाश की। जब दोनों बच्चियों को बाहर निकाला गया, तब तक उनकी सांसें थम चुकी थीं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
अंशिका की कहानी ने सबको रुला दिया
इस हादसे ने इसलिए भी सभी को झकझोर दिया क्योंकि अंशिका की मां का एक वर्ष पहले निधन हो चुका था। बीते गुरुवार को उसकी बुआ उसे अपने साथ प्यार से घर लाई थीं, लेकिन पांच दिन बाद ही उसकी मौत की खबर ने पूरे परिवार को तोड़ दिया। परिजनों का आरोप है कि पुल निर्माण के दौरान नाले में गहरे गड्ढे खोदे गए थे, जिन्हें भरवाया नहीं गया। उनका कहना है कि यदि सुरक्षा के इंतजाम किए गए होते, तो शायद दोनों मासूमों की जान बच सकती थी।
पुलिस ने शुरू की कार्रवाई
बिसंडा थाना प्रभारी सीपी तिवारी ने बताया कि नहाने के दौरान डूबने से दो बच्चियों की मौत हुई है। पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है।
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