यूबीटी युवा सेना के जिला प्रमुख विक्रम रणधावे ने आ

आवारा कुत्तों के विरोध में यूबीटी युवा सेना नेता ने अधिकारी की मेज पर फेंके पिल्ले, मचा हड़कंप

नासिक में आवारा कुत्तों के खिलाफ अनोखा विरोध

नासिक: महाराष्ट्र के नासिक जिले के निफाड में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या की समस्या के मद्देनजर, यूबीटी युवा सेना के जिला प्रमुख विक्रम रणधावे ने विरोध के प्रतीक के रूप में एक नगर निगम अधिकारी के कार्यालय की मेज पर एक बोरी में जीवित पिल्लों को फेंक दिया। निफाड नगर पंचायत कार्यालय में हुई इस घटना की नगर प्रशासन और पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने कड़ी निंदा की, जबकि युवा नेता ने शहर में कुत्तों के काटने की बढ़ती घटनाओं का हवाला देते हुए अपने कृत्य का बचाव किया।

आवारा पशुओं के मुद्दे पर आक्रामक प्रदर्शन और हंगामा

घटना का विवरण देते हुए, निफाड नगर पंचायत के मुख्य अधिकारी धीरज भामरे ने बताया कि नेता अन्य लोगों के साथ उनके कार्यालय में घुस आए और जानवरों को उनकी मेज पर छोड़ने से पहले आक्रामक व्यवहार किया। कल एक पार्षद उनके पति और तीन अन्य लोग मेरे कार्यालय में आए। वे जबरदस्ती अंदर घुस आए और आवारा पशुओं के संबंध में कथित निष्क्रियता को लेकर जोर-जोर से चिल्लाने लगे। वे बातचीत करने को तैयार नहीं थे। फिर उन्होंने बंद बोरी में बंद पिल्लों को मेरी मेज पर फेंक दिया। 

दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग

उन्होंने इस कृत्य को निंदनीय बताते हुए मुख्य अधिकारी ने आगे कहा, इससे वहां मौजूद सभी लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गईं। हमें यह भी पता चला कि पिल्ले किसी के थे और उन्हें मालिक की अनुमति के बिना यहां लाया गया था। हम जिला और पुलिस प्रशासन से आग्रह करते हैं कि वे कड़ी कार्रवाई करें और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाएं। अपने विवादास्पद विरोध का बचाव करते हुए विक्रम रंधावे ने आरोप लगाया कि बार-बार अपील करने के बावजूद नगर प्रशासन ने जन सुरक्षा की अनदेखी की है।

जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग

निफाड शहर में आवारा कुत्तों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है, जिससे महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और बच्चों पर हमले हो रहे हैं। हमने मुख्य अधिकारी को कई बार सूचित किया, लेकिन उन्होंने पिछले सात महीनों से इस मामले को टाल रखा है। अस्पताल के रिकॉर्ड का हवाला देते हुए रंधावे ने कहा, निफाड सिटी अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार, जून और जुलाई के बीच कुत्ते के काटने के 154 मामले दर्ज किए गए, जिसके बाद अगस्त में 151 मामले सामने आए। अगर ऐसी घटनाएं हर महीने होती हैं, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

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