भोपाल। पेट्रोल-डीजल बचाने के लिए प्रधानमंत्री नरें

प्रधानमंत्री की अपील पर ईधन बचाने का अजब तरीका

प्रधानमंत्री की अपील पर ईधन बचाने का अजब तरीका

भोपाल। पेट्रोल-डीजल बचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कम गाड़ियों में सफर करने की अपील का असर अब मध्यप्रदेश में भी दिखाई देने लगा है। भाजपा के मंत्री और आयोगों के अध्यक्ष अपने वाहन काफिले कम कर रहे हैं। नवनियुक्त अध्यक्ष भले ही ई-स्कूटर और ई-रिक्शा से पदभार ग्रहण करने पहुंचे, लेकिन उनके पीछे समर्थकों की गाड़ियों का लंबा काफिला भी नजर आया।

सीएम ने कम किया काफिला

इधर, सीएम डॉ. मोहन यादव ने अपने जेड प्लस काफिले से 5 गाड़ियां कम कर दी हैं। पहले उनके काफिले में 13 वाहन चलते थे, अब यह संख्या घटकर 8 रह गई है। सीएम ने मंत्रियों और निगम-मंडलों के नए अध्यक्ष-उपाध्यक्षों को भी निर्देश दिए हैं कि वे पदभार ग्रहण करने के दौरान वाहनों की लंबी कतारों से बचें। वल्लभ भवन में डिप्टी सीएम समेत कुछ मंत्री सरकारी वाहनों से पहुंचे।

अधिकारी कार शेयर करें तो रोज 1000 लीटर पेट्रोल बच सकता है

वल्लभ भवन, सतपुड़ा-विंध्याचल और अरेरा हिल्स के सरकारी दफ्तरों में आने वाले अधिकारी यदि कार-पूलिंग शुरू करें तो रोज करीब 1000 लीटर पेट्रोल की बचत हो सकती है। वल्लभ भवन में करीब 125 अफसर हैं। मंत्रियों और स्टाफ को जोड़ लें तो संख्या 200 तक पहुंच जाती है। भोपाल के अन्य सरकारी दफ्तरों में आने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों को जोड़कर देखें तो रोज हजारों लीटर ईंधन बचाया जा सकता है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवाल की अपील का असर

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने मंगलवार को पीएम की अपील को दोहराते हुए कहा कि पेट्रोल-डीजल की खपत कम होगी तो आयात भी घटेगा। उन्होंने सामान्य परिवहन के उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही। खंडेलवाल स्वयं भी ई-रिक्शा से पहुंचे। उनके साथ खादी ग्रामोद्योग के अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारी भी ई-रिक्शा से पहुंचे। 

साइकिल से कोर्ट पहुंचे जज

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के 58 वर्षीय न्यायाधीश, जस्टिस द्वारकाधीश बंसल, अपनी लग्जरी कार को घर पर छोड़कर साइकिल से न्यायालय पहुँचे। उन्होंने सिविल लाइंस से हाई कोर्ट तक का 3 किलोमीटर का सफर साइकिल से तय किया। विशेष बात यह रही कि उनके साथ उनके सुरक्षा गार्ड भी साइकिल पर ही आए।

कर्मचारियों ने लिय़ा संकल्प

हाई कोर्ट परिसर में वकीलों और कर्मचारियों ने इस पहल की सराहना की और कई कर्मचारियों ने अब साइकिल से काम पर आने और ईंधन की बचत में सहयोग करने का निर्णय लिया है।

इधर, जबलपुर में आयुर्विज्ञान विवि के कुलगुरू पैदल विश्वविद्यालय पहुंचे

संस्कारधानी स्थित मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (MPMSU) ने भी अनुकरणीय पहल की है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने मंगलवार से ईंधन की बचत करने के लिए जमीनी स्तर पर कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।

​कुलगुरू व कुलसचिव ने पेश की मिसाल

​ईंधन बचाने के अभियान की शुरुआत विश्वविद्यालय के शीर्ष अधिकारियों ने की। विश्वविद्यालय के कुलगुरू (विसी) ने अपनी सरकारी गाड़ी छोड़कर सरकारी आवास से पैदल विश्वविद्यालय परिसर पहुंचे। शासकीय आवास लौटते समय भी पैदल वापस गये। इसी तरह कुलसचिव (रजिस्ट्रार) डॉ. पुष्पराज सिंह बघेल ने भी मिसाल पेश की। वे अपने दुपहिया वाहन को अन्य कर्मचारी के साथ शेयर कर विश्वविद्यालय पहुंचे। विश्वविद्यालय के अन्य बड़े कर्मचारी भी शीर्ष नेतृत्व की इस अनूठी पहल से प्रेरित होकर पूरा सहयोग दे रहे हैं।

कर्मचारी वाहन साझा कर दफ्तर पहुंच रहे

​कुलसचिव डॉ. पुष्पराज सिंह बघेल ने बताया कि ईंधन की बर्बादी को रोकने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय के कर्मचारियों ने मिलकर एक व्हीकल पूल तैयार किया है। ​इसके तहत आसपास रहने वाले कर्मचारी अब अलग-अलग गाड़ियों से आने के बजाय एक ही वाहन साझा कर दफ्तर पहुंच रहे हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन का प्रयास है कि सरकारी वाहनों का उपयोग सीमित और आवश्यक कार्यों के लिए ही किया जाए।

​जिला प्रशासन भी फिजूलखर्ची पर रोक लगा रहा

विश्वविद्यालय की इस पहल के बीच जबलपुर जिला प्रशासन भी ऊर्जा बचत को लेकर नए सिरे से मुस्तैद हो गया है। कलेक्टर के निर्देशानुसार, जिले के सभी शासकीय विभागों में वाहनों के ईंधन का सदुपयोग सुनिश्चित करने और फिजूलखर्ची पर रोक लगाने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।

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