उज्जैन। मध्य प्रदेश के सम्राट विक्रमादित्य विश्ववि

विश्वविद्यालय की परीक्षा में “अल्लाह” प्रश्न पर विवाद, जांच शुरू

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उज्जैन। मध्य प्रदेश के सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है, जब बीकॉम, बीबीए और बीसीए तृतीय वर्ष के फाउंडेशन कोर्स की परीक्षा में “अल्लाह” से संबंधित एक प्रश्न पूछा गया। सोमवार को आयोजित इस परीक्षा के बाद यह मामला अब राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बन गया है, जिसमें विरोध प्रदर्शन, आरोप और आधिकारिक जांच शामिल हो गई है।

प्रश्न संख्या 45 को लेकर विवाद

विवाद प्रश्न पत्र के प्रश्न संख्या 45 को लेकर है, जिसमें लिखा था, “अल्लाह के अलावा कोई नहीं है”, और छात्रों से सही उत्तर चुनने को कहा गया था। विकल्पों में सोमेश्वर, खुदा, शक्तिवान और “दंड देने वाला” शामिल थे। यह प्रश्न तब चर्चा में आया जब एक छात्र ने इसे चिन्हित किया, और सार्वजनिक होने के बाद व्यापक नाराज़गी देखने को मिली।

दक्षिणपंथी संगठनों ने जताया विरोध

कई संगठनों, विशेषकर दक्षिणपंथी समूहों ने इस प्रश्न का कड़ा विरोध किया। उन्होंने इसे अनुचित बताया और वैचारिक पक्षपात का आरोप लगाया। कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन हुए और प्रश्न पत्र बनाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठी। कुछ नेताओं ने इसे “सोची-समझी कोशिश” तक बताया और चेतावनी दी कि कार्रवाई न होने पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

विवाद बढ़ा तो परीक्षा समिति को भेजी

जैसे-जैसे विवाद बढ़ा, विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्थिति संभालने के लिए तेजी से कदम उठाए। मामला अब औपचारिक रूप से परीक्षा समिति को भेज दिया गया है, जो इस प्रश्न और उसके संदर्भ की समीक्षा करेगी। विश्वविद्यालय के अधिकारियों के अनुसार, समिति यह जांच करेगी कि क्या यह प्रश्न निर्धारित पाठ्यक्रम और शैक्षणिक ढांचे के अनुरूप था, और इसे शामिल करने से पहले उचित प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं।

विषय विशेषज्ञ तय करेंगे जिम्मेदारी

विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार अनिल कुमार शर्मा ने कहा कि यदि कोई प्रश्न विवादास्पद या अनुचित पाया जाता है, तो उसे परीक्षा समिति को भेजा जाता है। इस मामले में विषय विशेषज्ञ यह तय करेंगे कि प्रश्न पाठ्यक्रम और शैक्षणिक मानकों के अनुरूप है या नहीं, और इसकी जिम्मेदारी किसकी है।

यदि कोई त्रुटि पाई जाती है, तो संबंधित परीक्षक को नोटिस जारी किया जाएगा और आवश्यक होने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। अंतिम निर्णय पूरी जांच के बाद ही लिया जाएगा।

मॉडरेशन प्रक्रिया की समीक्षा होगी

विश्वविद्यालय के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, फाउंडेशन कोर्स में विभिन्न धर्मों का उल्लेख होता है, लेकिन इस तरह से प्रश्न पूछना असामान्य है और सामान्य प्रथा नहीं है। जांच में प्रश्न पत्र तैयार करने और मॉडरेशन प्रक्रिया की भी समीक्षा की जाएगी।

परीक्षा नियंत्रक से स्पष्टीकरण मांगा

कुलपति ने परीक्षा नियंत्रक से स्पष्टीकरण मांगा है और परीक्षा विभाग की बैठक बुलाई गई है ताकि इस चूक का आकलन किया जा सके। यदि प्रश्न को अनुचित माना जाता है, तो इसे मूल्यांकन से हटाया जा सकता है, जिससे छात्रों के अंक निर्धारण पर भी सवाल उठेंगे। यह घटना उज्जैन में हुई, जो मुख्यमंत्री मोहन यादव का गृह नगर है, इसलिए इसकी संवेदनशीलता और बढ़ गई है। राजनीतिक रंग लेने के कारण अब इस मुद्दे पर व्यापक स्तर पर नजर रखी जा रही है।

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