यूपी में BHAVYA योजना के तहत बांदा IM​​LC फेज-2 और

यूपी में औद्योगिक विकास को रफ्तार: बांदा IM​​LC फेज-2 और गोरखपुर धुरियापार परियोजनाओं के DPR मंजूर

State Level Committee meeting chaired by Chief Secretary S.P. Goyal

लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की अध्यक्षता में भारत औद्योगिक विकास योजना (BHAVYA) के अंतर्गत औद्योगिक परियोजनाओं के प्रस्तावों एवं विस्तृत परियोजना प्रतिवेदनों (डीपीआर) के अनुमोदन हेतु गठित राज्य स्तरीय समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) द्वारा प्रस्तावित इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर (आईएमएलसी), बांदा (फेज-2) तथा गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) द्वारा प्रस्तावित धुरियापार इंडस्ट्रियल एरिया परियोजना पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

बांदा और गोरखपुर की परियोजनाओं को डीपीआर मंजूरी

चर्चा के उपरांत समिति ने दोनों परियोजनाओं के डीपीआर को मंजूर करते हुए प्रस्तावों को भारत सरकार की राष्ट्रीय स्तरीय संचालन समिति से स्वीकृति प्राप्त करने के लिए प्रेषित करने के लिए संस्तुति की गई। मुख्य सचिव ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियां निर्धारित समयसीमा में प्राप्त करने तथा संबंधित विभागों एवं संस्थाओं के बीच प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि परियोजनाओं के क्रियान्वयन की प्रक्रिया समयबद्ध ढंग से आगे बढ़ाई जा सके।

धुरियापार में ₹102.35 करोड़ से बनेगा आधुनिक औद्योगिक क्षेत्र

बैठक में बताया गया कि भारत औद्योगिक विकास योजना के अंतर्गत गोरखपुर के धुरियापार में 120 एकड़ क्षेत्रफल में आधुनिक औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जाएगा। इस परियोजना की अनुमानित लागत ₹102.35 करोड़ है। परियोजना के अंतर्गत औद्योगिक प्लॉट, फ्लैटेड फैक्ट्री, वेयरहाउसिंग तथा कॉमन फैसिलिटी सेंटर जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

बांदा में ₹378.82 करोड़ से विकसित होगा IM​​LC फेज-2

आधुनिक औद्योगिक अवसंरचना एवं साझा सुविधाओं के विकास से क्षेत्र में उद्योगों की स्थापना को प्रोत्साहन मिलेगा और औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार होगा। भारत औद्योगिक विकास योजना के अंतर्गत बांदा में 310.27 एकड़ क्षेत्रफल में इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर (आईएमएलसी) फेज-2 विकसित किया जाएगा। इस परियोजना की अनुमानित लागत ₹378.82 करोड़ है। परियोजना में औद्योगिक, लॉजिस्टिक्स, वाणिज्यिक, आवासीय एवं सामाजिक अवसंरचना के विकास का प्रावधान किया गया है।

जलापूर्ति, ट्रीटमेंट प्लांट और बिजली जैसी सुविधाओं का विकास

परियोजना के अंतर्गत जलापूर्ति व्यवस्था, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी), कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी), विद्युत उपकेंद्र तथा अन्य आवश्यक आधारभूत सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इन सुविधाओं के विकास के उपरांत उद्योगों की स्थापना के लिए विकसित औद्योगिक भूखंड उपलब्ध कराए जाएंगे। दोनों परियोजनाएं भारत औद्योगिक विकास योजना के अंतर्गत निर्धारित शर्तों को पूरा करती हैं तथा योजना के तहत स्वीकृति के लिए प्रस्तावित हैं। इनके विकास से प्रदेश में औद्योगिक अवसंरचना का विस्तार होने के साथ निवेश आकर्षित करने और नए उद्योगों की स्थापना के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।

स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और व्यापार के नए अवसर

इसके अलावा, परियोजनाओं से स्थानीय युवाओं के लिए प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने, सहायक उद्योगों के विकास तथा व्यापारिक एवं लॉजिस्टिक्स गतिविधियों को गति मिलने की संभावना है। आधुनिक औद्योगिक सुविधाओं के विकास से संबंधित क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों के विस्तार को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

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