आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने यूपी सरकार पर नाम बदलने की

यूपी में नाम बदलने की राजनीति पर कांग्रेस का हमला, जेवर एयरपोर्ट और बंद उड़ानों पर उठाए सवाल

Uttar Pradesh Congress president Aradhna Mishra Mona (File Photo)

लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने कहा कि उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार पिछले दस वर्षों से काम करने के बजाय नाम बदलने की राजनीति कर रही है। लोग काम करके नाम कमाते हैं, लेकिन आदित्यनाथ सरकार नाम बदलकर काम चलाने में विश्वास रखती है। सरकार की प्राथमिकता विकास कार्यों को पूरा करना नहीं, बल्कि योजनाओं और संस्थानों के नाम बदलकर सुर्खियाँ बटोरना है। नाम बदलने की इस राजनीति की चपेट में अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी आ गए हैं।

आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने कहा कि मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने जेवर एयरपोर्ट का नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर रखने की घोषणा की है। दिसंबर 2020 में सरकार ने स्वयं इसका नाम ‘नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ तय किया था। अब जब विकास कार्यों के वास्तविक परिणामों पर सवाल उठ रहे हैं, तो नाम बदलने की राजनीति के जरिए ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है। 

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार पर ‘आगे पाट, पीछे सपाट’ की कहावत पूरी तरह चरितार्थ होती है। सरकार किसी योजना का उद्घाटन करती है, उसका नाम रखती है, प्रचार करती है और फिर वह योजना ठप हो जाती है। इसके बाद नया नारियल लेकर नई योजना के उद्घाटन की तैयारी शुरू हो जाती है। जनता के सामने विकास का प्रचार है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है।

जेवर एयरपोर्ट : किसानों की जमीन, जनता का पैसा और नाम की राजनीति

आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने कहा कि जेवर एयरपोर्ट के लिए किसानों की जमीन अधिग्रहित की गई। पहले और दूसरे चरण में लगभग 2,699 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित किए जाने का दावा है, जिसमें 15 हजार से अधिक किसान प्रभावित हुए। तीसरे चरण सहित परियोजना के लिए प्रस्तावित कुल भूमि लगभग 6,200 हेक्टेयर बताई गई है। किसानों ने अपनी जमीन दी और परियोजना पर जनता के पैसे का निवेश हुआ, लेकिन अब सरकार की प्राथमिकता एयरपोर्ट का संचालन बेहतर बनाने के बजाय उसका नाम बदलने पर केंद्रित दिखाई दे रही है।

उन्होंने कहा कि 28 मार्च 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एयरपोर्ट के पहले चरण का उद्घाटन किया और 15 जून 2026 से व्यावसायिक उड़ानें शुरू हुईं। लेकिन उद्घाटन के कुछ ही समय बाद उड़ानों के संचालन को लेकर सवाल उठने लगे।

उपलब्ध विवरण के अनुसार, जून-जुलाई 2026 में नोएडा से नवी मुंबई और बेंगलुरु के लिए अकासा एयर की उड़ानें बंद हुईं, जबकि नोएडा-चंडीगढ़ मार्ग पर इंडिगो की उड़ान भी बंद होने की बात सामने आई। एयर इंडिया एक्सप्रेस ने भी यहां से उड़ान शुरू करने की योजना टाल दी। कमजोर सड़क एवं रेल कनेक्टिविटी, महंगी टैक्सी, सीधी मेट्रो का अभाव और एयरपोर्ट शुल्क जैसी समस्याओं को इसके पीछे की वजह बताया गया है।

आराधना मिश्रा ने कहा कि सरकार को बताना चाहिए कि जिस एयरपोर्ट का इतना प्रचार किया गया, वहां यात्रियों के लिए बेहतर कनेक्टिविटी और नियमित उड़ानों की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। केवल नाम बदलने से विकास नहीं होता, विकास के लिए मजबूत बुनियादी ढांचा और प्रभावी संचालन जरूरी है।

उद्घाटन के बाद हवाई अड्डों पर उड़ानें बंद, जनता के पैसे का क्या हुआ?

मिश्रा ने कहा कि मामला केवल जेवर एयरपोर्ट तक सीमित नहीं है। उत्तर प्रदेश में छोटे शहरों को हवाई संपर्क से जोड़ने के नाम पर कई हवाई अड्डों का उद्घाटन किया गया, लेकिन उनमें से अनेक पर नियमित उड़ानें बंद होने या शुरू ही नहीं होने की शिकायतें सामने आई हैं। उपलब्ध विवरण के अनुसार, वर्ष 2021 के बाद उद्घाटित सात हवाई अड्डों पर नियमित उड़ानों की स्थिति गंभीर सवाल खड़े करती है। इनमें कुशीनगर, आजमगढ़, अलीगढ़, चित्रकूट, श्रावस्ती, मुरादाबाद और सरसावा (सहारनपुर) शामिल हैं।

उड़ानों के संचालन को लेकर उठ रहे प्रमुख सवाल इस प्रकार हैं :

  • कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट: 20 अक्टूबर 2021 को उद्घाटन हुआ। यहां नवंबर 2023 से उड़ानें बंद होने की बात सामने आई है।
  • आजमगढ़ एयरपोर्ट: 10 मार्च 2024 को उद्घाटन के बाद नवंबर 2024 से उड़ानें बंद होने का विवरण सामने आया।
  • अलीगढ़ एयरपोर्ट: उद्घाटन के बाद नियमित उड़ानों के संचालन पर सवाल हैं।
  • चित्रकूट एयरपोर्ट: उद्घाटन के बाद दिसंबर 2024 से उड़ानें बंद होने की बात कही गई है।
  • श्रावस्ती एयरपोर्ट: उद्घाटन के बाद नियमित उड़ानों का संचालन नहीं होने की जानकारी सामने आई है।
  • मुरादाबाद एयरपोर्ट: अगस्त 2024 में उड़ानें शुरू हुईं, लेकिन नवंबर 2024 से बंद होने की बात कही गई। 
  • सरसावा एयरपोर्ट, सहारनपुर: उद्घाटन के बावजूद नियमित उड़ान सेवाओं का संचालन शुरू नहीं होने का मुद्दा उठ रहा है।

उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं पर हुए खर्च और उनके वास्तविक उपयोग को लेकर सरकार को स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। इन हवाई अड्डों पर 1,500 से 2,000 करोड़ रुपये तक खर्च किए जाने का दावा किया जा रहा है। यदि सार्वजनिक धन से बुनियादी ढांचा तैयार किया गया है, तो उसका उपयोग सुनिश्चित करना भी सरकार की जिम्मेदारी है। केवल उद्घाटन कर देना विकास नहीं है; जनता को उसका लाभ मिलना चाहिए।

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