उत्तर प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा, 10 नए प्रस्तावों को SLEC के लिए मंजूरी
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के कुशल मार्गदर्शन एवं निर्देशों के अनुक्रम में खाद्य प्रसंस्करण विभाग राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और समृद्धि के नए द्वार खोल रहा है। उप मुख्यमंत्री मौर्य के आदेशों के क्रम में आज दिनांक 26 सितम्बर 2026 को ऑनलाईन के माध्यम से अपर मुख्य सचिव, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण, उत्तर प्रदेश शासन बी.एल. मीणा की अध्यक्षता में ‘उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023’ के अंतर्गत गठित अप्रेजल समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई, बैठक में प्रदेशभर से ऑनलाइन पोर्टल पर प्राप्त कुल 16 नवीन आवेदनों में से 10 पूर्ण प्रस्तावों का गहन परीक्षण कर उन्हें राज्य स्तरीय अधिकार प्राप्त समिति (एस.एल.ई.सी.) के समक्ष अग्रसारित करने हेतु संस्तुति प्रदान कर स्वीकार कर लिया गया।
इन जिलों में स्थापित होंगी नई इकाइयां
इन स्वीकृत प्रस्तावों में पीलीभीत, बरेली, आगरा, सीतापुर, हाथरस, कानपुर नगर तथा कुशीनगर जनपदों से जुड़ी प्रमुख इकाइयां शामिल हैं। इनमें दाल, पापड़, स्नैक्स, नमकीन, मल्टीग्रेन आटा, मैक्रोनी, पास्ता, सॉस तथा गुड़ (जैगरी) निर्माण की नवीन इकाइयों की स्थापना और विस्तारीकरण के साथ-साथ ऊर्जा संरक्षण हेतु सोलर पावर प्लांट की स्थापना से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं। साथ ही यह व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है कि इन इकाइयों के लिए कच्चे माल की आपूर्ति स्थानीय कृषकों से की जाए, जिससे प्रति इकाई न्यूनतम 100 कृषकों को सीधा लाभ मिलेगा।
ग्रामीण विकास और समग्र प्रगति का संकल्प
अपर मुख्य सचिव बी.एल. मीणा ने बताया कि उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की दूरदर्शी सोच का मूल मंत्र "ग्रामीण क्षेत्रों का विकास, जिससे उत्तर प्रदेश के समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त हो" है। विभाग इसी संकल्प और सोच के साथ धरातल पर निरंतर कार्य कर रहा है। 'उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023' प्रदेश में औद्योगिक विकास का पहिया तेजी से घुमा रही है।
युवाओं-महिलाओं को मिलेगा रोजगार और बढ़ावा
उन्होंने आगे कहा कि ग्रामीण अंचलों में खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के स्थापित होने से स्थानीय स्तर पर युवाओं और महिलाओं को बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त होगा। इससे महिलाएं आत्मनिर्भर होंगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था आर्थिक रूप से सुदृढ़ व सशक्त बनेगी। किसानों की फसलों को स्थानीय स्तर पर बेहतर मूल्य मिलेगा, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी और उत्तर प्रदेश एक विकसित राज्य बनने की दिशा में तीव्र गति से अग्रसर होगा।
उन्होंने विशेष रूप से कच्चे माल की उपलब्धता, स्थानीय कृषकों से आपूर्ति, उत्पादन क्षमता, पर्यावरण एवं प्रदूषण नियंत्रण संबंधी प्रमाण-पत्र तथा अन्य आवश्यक वैधानिक अनुमतियों से संबंधित शर्तों के अनुपालन पर बल दिया गया और संबंधित इकाइयों को निर्धारित अभिलेख एवं प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए साथ ही प्रस्तुत प्रस्तावों के माध्यम से प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में निवेश, स्थानीय स्तर पर कृषि उपज के मूल्य संवर्धन तथा रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने की दिशा में संभावनाओं पर भी विचार किया गया।
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