पंचायत चुनाव से पहले नए ओबीसी आयोग का गठन, नवंबर 2026 तक आएगी रिपोर्ट
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की आहट के साथ ही सरकार ने अपनी प्रशासनिक तैयारियां तेज कर दी है। राज्य में पिछड़ों के हक और सटीक आरक्षण व्यवस्था को लागू करने के लिए योगी सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए नए ओबीसी आयोग के गठन का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। पंचायत चुनाव के लिए आयोग के चेयरमैन और सदस्य भी नियुक्ति कर दिए गये है।
राम औतार सिंह की अध्यक्षता में आयोग को सौंपी गई जिम्मेदारी
इस आयोग की कमान इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज राम औतार सिंह को सौंपी गई है। वे इससे पहले साल 2023 में हुए नगरीय निकाय चुनावों के दौरान बने पिछड़ा वर्ग आयोग के भी अध्यक्ष रह चुके हैं। आयोग में चार सदस्यों को शामिल किया गया है। इसमें दो सेवानिवृत्त अपर जिला जज बृजेश कुमार और संतोष कुमार विश्वकर्मा और दो सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डॉ. अरविंद कुमार और एसपी सिंह शामिल हैं। यह टीम पूरे 75 जिलों जाकर ओबीसी की आबादी के आंकड़े एकत्रित करेगी और नवंबर 2026 तक अपनी रिपोर्ट सरकार के सामने पेश करेगी। इस पूरी प्रक्रिया में काफी समय लगने की संभावना है ऐसे में संभवतः पंचायत चुनाव विधानसभा चुनाव के बाद ही होंगे।
रिपोर्ट के बाद तय होगा पंचायतों में आरक्षण का अंतिम स्वरूप
पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट और सर्वे के आधार पर ही यह तय होगा कि किस क्षेत्र की कौन सी पंचायत सीट ओबीसी महिला और पुरुष के लिए आरक्षित होगी और कौन सी सामान्य रहेगी। यूपी में पिछला पंचायत चुनाव 2021 में हुआ था। पंचायतों का 5 साल का कार्यकाल पूरा होने जा रहा है और संवैधानिक नियमों के अनुसार मौजूदा कार्यकाल ख़त्म होने से पहले चुनाव संपन्न हो जाने चाहिए थे। लेकिन अड़चन आती रही और विलंब होता चला गया। हालांकि आयोग की गठित ये टीम अब तेज गति से काम करेगी और आंकड़े जुटाएगी।
कार्यकाल पूरा होने पर प्रशासक नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू
इधर पंचायती राज विभाग ने ग्राम प्रधानों का कार्यकाल ख़त्म होने के बाद कामकाज संभालने के लिए प्रशासक की नियुक्ति या प्रशासनिक समिति के गठन का प्रस्ताव भी भेज दिया है। अब आयोग की रिपोर्ट का इंतजार है। नियम के मुताबिक, इस आयोग को अपना पदभार ग्रहण करने की तारीख से ठीक छह महीने के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी। आयोग की यह फाइनल रिपोर्ट नवंबर 2026 तक आ जानी चाहिए जिसके बाद ही उत्तर प्रदेश की पंचायतों में ओबीसी सीटों का आरक्षण फाइनल किया जाएगा।