70 जनपदों में संचालित जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण सं

शिक्षा सुधारों को स्थायी आधार दे रही योगी सरकार, डायट के 3,346 पदों का स्थायीकरण

UP Government Gives Permanent Status to 3,346 DIET Posts Under Education Reforms

लखनऊ, 17 जून। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षा सुधारों को केवल योजनाओं और घोषणाओं तक सीमित नहीं रख रही है। उन्हें धरातल पर लागू करने वाले संस्थानों को भी स्थायी मजबूती प्रदान कर रही है। प्रदेश के 70 जनपदों में संचालित जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) के कुल 3,346 पदों के स्थायीकरण का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। 

अस्थायी रूप से संचालित शैक्षणिक एवं प्रशासनिक पदों अब होंगे स्थायी 

अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग पार्थ सारथी सेन शर्मा द्वारा जारी आदेश के अनुसार वर्षों से अस्थायी रूप से संचालित शैक्षणिक एवं प्रशासनिक पदों को अब स्थायी स्वरूप प्रदान किया जाएगा। यह निर्णय प्रदेश की शिक्षक प्रशिक्षण व्यवस्था, शैक्षणिक अनुसंधान तथा अकादमिक नेतृत्व को दीर्घकालिक मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। चुंकि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की मजबूत नींव प्रशिक्षित और दक्ष शिक्षकों पर आधारित होती है। यही कारण है कि विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं और अधिगम परिणामों में सुधार के साथ-साथ उन संस्थानों को भी सुदृढ़ किया जा रहा है जो शिक्षकों के प्रशिक्षण, शैक्षणिक नवाचार और शिक्षा की गुणवत्ता सुधार में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं। डायट, प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था के ऐसे ही प्रमुख स्तंभ हैं, जिन्हें अब स्थायी मानव संसाधन संरचना का आधार मिलने जा रहा है।

योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में शिक्षा सुधार का दायरा बढ़ा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में शिक्षा सुधार का दायरा लगातार विस्तृत हुआ है। विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, डिजिटल शिक्षण, निपुण भारत मिशन, बाल वाटिका, शिक्षक प्रशिक्षण और अधिगम गुणवत्ता सुधार जैसे कार्यक्रमों के साथ-साथ अब शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों को भी मजबूत किया जा रहा है। डायट के 3,346 पदों का स्थायीकरण इस बात का प्रमाण है कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को अल्पकालिक नहीं, बल्कि स्थायी और परिणामोन्मुखी आधार पर विकसित करने की दिशा में कार्य कर रही है। यह निर्णय न केवल प्रदेश की शिक्षक प्रशिक्षण व्यवस्था को नई ऊर्जा देगा, बल्कि शैक्षणिक अनुसंधान, अकादमिक नेतृत्व और गुणवत्ता आधारित शिक्षा सुधारों को भी मजबूत आधार प्रदान करेगा। आने वाले वर्षों में यह कदम उत्तर प्रदेश को अधिक सक्षम, आधुनिक और परिणामोन्मुख शिक्षा व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

प्राचार्य से लेकर चतुर्थ श्रेणी तक सभी संवर्गों को मिला लाभ

जारी आदेश के अनुसार 70 प्राचार्य, 70 उप प्राचार्य, 420 वरिष्ठ प्रवक्ता, 1,190 प्रवक्ता, 70 सांख्यिकीविद, 70 कार्यानुभव शिक्षक, 70 तकनीकी सहायक, 70 कार्यालय अधीक्षक, 70 पुस्तकालयाध्यक्ष, 70 लेखाकार, 70 आशुलिपिक, 630 लिपिक, 126 प्रयोगशाला सहायक तथा 350 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों सहित कुल 3,346 पदों का स्थायीकरण किया जाएगा। इससे डायट संस्थानों में शैक्षणिक, तकनीकी और प्रशासनिक कार्यों के संचालन को स्थिरता और निरंतरता मिलेगी।

वर्षों पुरानी व्यवस्था को मिला स्थायी स्वरूप

शासनादेश के अनुसार ये पद विभिन्न चरणों में वर्ष 1989, 1990, 1995 और 2004 में सृजित किए गए थे तथा लंबे समय से अस्थायी व्यवस्था के अंतर्गत संचालित हो रहे थे। शासन ने इन पदों की निरंतर आवश्यकता और शिक्षा व्यवस्था में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए उन्हें स्थायी स्वरूप प्रदान करने का निर्णय लिया है। इससे डायट संस्थानों की कार्यक्षमता, जवाबदेही और प्रशासनिक स्थिरता में वृद्धि होगी।

शिक्षक प्रशिक्षण व्यवस्था को मिलेगा नया आधार

प्रदेश में निपुण भारत मिशन, नई शिक्षा नीति-2020, आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (एफएलएन), बालवाटिका, क्षमता संवर्धन कार्यक्रमों तथा नवाचार आधारित शिक्षण पद्धतियों के प्रभावी क्रियान्वयन में डायट संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका है। शिक्षक प्रशिक्षण, शैक्षणिक अनुसंधान, पाठ्यचर्या क्रियान्वयन और अकादमिक मार्गदर्शन जैसे कार्य इन्हीं संस्थानों के माध्यम से संचालित होते हैं। पदों के स्थायीकरण से इन गतिविधियों को और अधिक गति तथा संस्थागत मजबूती मिलेगी।

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